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जवाहर बाग का सच सामने लाएंगे ये 14 राज

Sun, 26 Jun 2016 03:21 AM IST
पुनीत शर्मा/अमर उजाला, मथुरा
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जवाहर बाग हिंसा की न्यायिक आयोग ने जांच शुरू कर दी हैं। आयोग ने घटना के कारण, खुफिया तंत्र की रिपोर्ट, पुलिस की कार्ययोजना, पर्यवेक्षण, घटना को रोकने के लिए किए गए प्रबंधों और किसी के प्रभाव पर आदि छह बिंदुओं पर जांच को केंद्रित किया है।
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जांच के लिए इनसे जुड़े करीब 14 बिंदुओं पर प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। ये वह महत्वपूर्ण बिंदु है जो प्रशासन की फाइलों से बाहर आए तो जवाहर बाग का सच भी सामने आएगा, साथ ही हिंसा में 29 लोगों की मौत के मामले की जांच को नतीजे तक पहुंचाएंगे।

जवाहर बाग हिंसा का सूत्रधार रामवृक्ष यादव मार्च, 2014 में 500 लोगों के साथ यहां पहुंचा था। सत्याग्रह के नाम पर प्रशासन से दो दिन की अनुमति ली और फिर यहीं जम गया। 500 की भीड़ कब 3000 में बदल गई किसी को पता ही नहीं चला।
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हालांकि अधिकारी कहते हैं कि समय-समय पर बाग खाली कराने के प्रयास होते रहें लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण बल का प्रयोग नहीं किया जा रहा था। आरोप प्रशासन के राजनीतिक दबाव में होने के भी लगते रहे।

दो जून को बाग खाली कराने अफसर पहुंचे तो बड़ी हिंसा हो गई। पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की जान चली गई। अब न्यायिक आयोग ने हिंसा के साथ पूरे मामले की तह तक जाकर जांच करने की तैयारी शुरू की है।

आयोग ने प्रशासन से इस संबंध में मौजूद सभी रिकार्ड देने को कहा है। इसमें 15 मार्च, 2014 से दो जून, 2016 तक की गई संपूर्ण कार्रवाई के साक्ष्य मांगे हैं। इनमें एफआईआर, केस डायरी, हाईकोर्ट के आदेश, अवमानना, जनरल डायरी भी शामिल रहें।

इन बिंदुओं पर तलब की रिपोर्ट


1- जवाहर बाग में लोगों को घुसने की अनुमति किसने दी और क्यों दी
2- मार्च 2014 से 2016 तक बाग खाली कराने को क्या-क्या प्रयास हुए
3- प्रशासन ने कितनी दफा नोटिस जारी किए
4- लगातार होने वाले नुकसान पर क्यों खामोश रहे अफसर 
5- शासन को कितनी दफा जवाहर बाग के लिए रिपोर्ट भेजी
6- फोर्स की मांग कब-कब और किससे की गई थी
7- कितनी दफा पुलिस-प्रशासनिक अफसर बाग खाली कराने पहुंचे
8- खुफिया विभाग समय-समय पर क्या रिपोर्ट प्रशासन को देता रहा
9- जवाहर बाग में रसद पहुंच रही है इसकी जानकारी होने पर क्या किया
10- जवाहर बाग को खाली कराने के लिए क्या प्लान प्रशासन ने बनाया था
11- दो जून को जब हिंसा हुई तो उस दौरान कितने अधिकारी मौजूद थे
12- हिंसा के बाद जवाहर बाग से होने वाली बरामदगी का रिकार्ड
13- हिंसा में मरने वालों की शिनाख्त के वैज्ञानिक आधार क्या है
14- रामवृक्ष की वैज्ञानिक पहचान के लिए किए गए प्रयास
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पुलिस के पास नहीं रामवृक्ष का वैज्ञानिक आधार 

 रामवृक्ष मर गया, पुलिस ने चार जून को गृह विभाग को भी यह रिपोर्ट भेज दी थी। लेकिन उसकी मौत का कोई वैज्ञानिक आधार अभी तक पुलिस के पास नहीं है। उसका डीएनए सैंपल तो  लिया था लेकिन उसका परिवारीजनों के डीएनए से मिलान नहीं कराया है। अदालत ने भी पिछले दिनों टिप्पणी की थी कि जब तक पुलिस कोई वैज्ञानिक आधार नहीं देगी, उसे मरा नहीं माना जा सकता।

40 अफसरों से होगी पूछताछ
मार्च 2014 से दो जून 2016 तक रहने वाले सभी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से पूछताछ की जानी है। इसके लिए सभी को नोटिस जारी होगा। न्यायिक आयोग के अध्यक्ष ने इस संबंध में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। मौजूदा समय में यह अफसर कहां हैं, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।


जवाहर बाग हिंसा एक नजर

एसपी सिटी और थानाध्यक्ष समेत 29 की मौत
गिरफ्तार- 258 लोग, महिलाएं 96 व उनके साथ 76 बच्चे
मामले में दर्ज मुकदमों की संख्या-54
फायरिंग हुई-300 राउंड
बरामदगी- 66 तमंचे, 6 रायफल बंदूक, 90 कारतूस, 6 किलो विस्फोटक पदार्थ, सुतली बम, ग्रेनेड, लांचर
18 दरोगा कर रहे हैं केस की विवेचना 

चंदनबोस और राकेश गुप्ता गिरफ्तार, वीरेश फरार
​रामवृक्ष के खास सिपहसलार माने जाने वाले चंदनबोस और राकेश गुप्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है जबकि वीरेश यादव अभी तक  फरार चल रहा है। वीरेश की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। कई आश्रमों में उसे तलाशा जा रहा है। पुलिस का मानना है कि अगर वीरेश हाथ लग जाता है तो रामवृक्ष के नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लग सकते हैं।
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