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कवायद : शहरों के माथे से हटेगा 130 करोड़ टन कचरे का बोझ, 3000 डंपिंग ग्राउंड बनेंगे, खर्च होंगे 1.41 लाख करोड़

Fri, 16 Sep 2022 06:33 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

सीएसई के ठोस कचरा प्रबंधन कार्यक्रम के निदेशक अतिन बिस्वास ने कहा, विरासती कचरे की कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है, न इसका कोई पैमाना है, जिससे यह तय किया जाए कि कितना पुराना और किस तरह का कचरा विरासती कचरा माना जाए।
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कचरा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के हर चमकते शहर के सिर पर पल रहे कचरे के पहाड़ के बोझ को उतारने की योजना बनाई गई है। देशभर के शहरों में 3,000 से ज्यादा डंपिंग ग्राउंड से 130 करोड़ टन कचरे को हमेशा के लिए साफ कर इस जमीन को शहर के लिए फिर से मुहैया कराया जाएगा। 

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सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने बृहस्पतिवार को देश को मुक्त भारत बनाने की रूपरेखा पेश की। सरकार ने इन डंपिंग ग्राउंडों को स्वच्छ व उपचारित करने के लिए 1,41,600 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। स्वतंत्र भारत में स्वच्छता कार्यक्रम के तहत यह सबसे बड़ा निवेश है।

सीएसई ने शहरों को कचरा मुक्त करने के लिए तीन दस्तावेज पेश किए। इनमें स्वच्छ भारत मिशन 2.0 का समर्थन करने के लिए विरासती कचरा प्रबंधन, डंपसाइट उपचार टूलकिट और शहरों की ठोस कचरा कार्ययोजना पेश की गई है। 
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विरासती कचरे पर सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा, यह शब्द (लैगेसी वेस्ट या विरासती कचरा) स्वच्छ भारत अभियान 2.0 के चलते चर्चा में आया है, जिसके मुताबिक यह तय किया गया है कि भारत के शहरों के सभी पुराने डंपिंग ग्रांउंड साफ होने चाहिए। 

इसके साथ ही डंपिंग ग्राउंड की जमीन उपयोगी बनाने और वहां फिर से कचरा जमा नहीं होने का प्रबंध करना होगा। उन्होंने कहा कि इस कचरे को खत्म करना और डंपिंग ग्राउंडों को साफ कर उपयोगी बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है।

सीएसई की तरफ से योजना पेश करने के दौरान आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय की संयुक्त सचिव रूपा मिश्रा ने बताया कि मंत्रालय ने कई परियोजनाएं व योजनाएं शुरू की हैं, जिनके तहत शहरी प्रशासन को इसके लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे देश को कचरा मुक्त बनाने की पहल में शामिल हों। 

वहीं, सीएसई के ठोस कचरा प्रबंधन कार्यक्रम के निदेशक अतिन बिस्वास ने कहा, विरासती कचरे की कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है, न इसका कोई पैमाना है, जिससे यह तय किया जाए कि कितना पुराना और किस तरह का कचरा विरासती कचरा माना जाए। मोटे तौर पर शहरों के ऐसे डंपिंग ग्राउंड विरासती कचरे की श्रेणी में आते हैं, जहां हर तरह का कचरा स्थायी तौर पर छोड़ दिया जाता है।

कचरे से मुक्ति के मंत्र
सीएसई ने विरासती कचरे से जुड़ी टूलकिट के तहत सात बिंदुओं के तहत एक स्थायी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना पेश की है।

  • स्थायी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना विकसित करना
  • कचरे का अधिकतम उपयोग व उपचार
  • कचरा मुक्त जमीन को उपयोगी बनाना
  • कचरे के लाभकारी उपयोग के लिए मानक तय करना
  • कचरे से उपयोगी सामग्री के प्रबंधन को प्रोत्साहन देना
  • शहरी विभागों व कार्मिकों में क्षमता निर्माण
  • सैनिटरी लैंडफिल का निर्माण व संवहनीय संचालन
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