मेघायल की ईस्ट जयंतिया हिल्स स्थित गैरकानूनी कोयला खदान में 13 दिसंबर से फंसे 15 मजदूरों को बचाने का काम अभी भी जारी है। हाई पावर्ड पंप से खदान का पानी निकालने का काम शुरू हो चुका है। 13 दिसंबर को बाढ़ से बच निकलने में कामयाब हुए एक अन्य मजदूर का कहना है कि ऐसा कोई रास्ता नहीं है जहां से फंसे हुए मजदूर जिंदा बाहर निकल पाएं। यह खदान 370 फीट गहरी है।
मूल रूप से असम के रहने वाले साहिब अली ने उस दिन की कहानी बताते हुए कहा कि कुल 22 मजदूर खदान में काम कर रहे थे, जिनमें से 17 वहीं रह गए और बाकी के पांच अपने घर चले गए। उसने कहा, "मैं बीते दो हफ्तों से काम कर रहा था। वहां और भी कई मजदूर थे। लेकिन वह काफी नीचे थे। मेरे जैसे गाड़ी खींचने का काम करने वाले उन छोट गड्ढों में ठीक से खड़े नहीं हो पाते। चार अन्य लोग कोयले को मेटल बॉक्स में डालने का काम करते हैं।"
अली ने आगे कहा, "सभी मजदूरों ने सुबह 5 बजे काम शुरू कर दिया था। 7 बजे पूरी खदान पानी से भर चुकी थी। मैं खदान में पांच से छह फीट नीचे था। मुझे खदान में हवा को लेकर समस्या होने लगी। इसके बाद पानी की तेज आवाज आई। ऐसा कोई रास्ता नहीं है कि फंसे हुए आदमी बाहर जीवित आ सकें। कितने लंबे समय तक कोई पानी के अंदर अपनी सांसें रोक सकता है।"
अगर अली की कहानी पर विश्वास करें तो खदान में 15 नहीं बल्कि 17 लोग हैं। अली का कहना है, "मैं बस यही आशा करता हूं कि उनके शव बाहर निकलते देख सकूं और उनका अंतिम संस्कार रीति रिवाजों के अनुसार हो पाए।"
एनडीआरएफ के अधिकारी का कहना है कि 370 फीट गहरी खदान में 29 दिसंबर तक 170 फीट तक पानी भरा हुआ है। अली ने कहा कि खदान में काम करने के बाद वह दिन में 800-1500 रुपये कमा लेते हैं। इसलिए उन्होंने कुछ समय तक काम करने के बाद में ही घर जाने का फैसला किया। फंसे हुए मजदूरों के परिवार पहले ही उनके जिंदा बचने की उम्मीद छोड़ चुके हैं और सरकार से अनुरोध किया है कि अंतिम संस्कार के लिए शवों को बाहर निकाला जाए।
सोहर अली का भाई, बेटा और दामाद भी खदान में फंसे हुए हैं। उनका कहना है कि अपने रिश्तेदारों के जीवित बाहर निकलने की उम्मीद वह छोड़ चुके हैं। वह केवल इतना चाहते हैं कि अंतिम संस्कार के लिए शवों को बाहर निकाला जाए।
सोहर अली ने ही घटना की जानकारी वहां के विधायक आजाद अमन को दी थी। जिन्होंने जिले के एसपी को खबर को सत्यापित करने को कहा। विधायक का कहना है कि पुलिस को घटनास्थल के बारे में पता लगाने में ही घंटों लग गए। राज्य सरकार ने 22 दिसंबर को ही खदान में फंसे मजदूरों को एक लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की घोषणा की थी। इन लोगों का बच पाना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।