आत्मनिर्भर भारत की कल्पना को साकार करने के लिए कृषि उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत कृषि मंत्रालय अब युवाओं को कृषि के क्षेत्र और उससे संबधित उद्योगों को लगाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके पहले चरण में 2020-21 में 122 स्टार्टअप्स को 1,185.90 लाख रुपयों की सहायता राशि दी जाएगी।
मंत्रालय का मकसद इसके जरिये युवाओं को अधिक से अधिक खेती और किसानी से जुडे़ व्यवसायों के लिए प्रेरित करना है। इससे रोजगार की समस्या का समाधान होगा और ग्रामीण युवा आत्मनिर्भर बन सकेंगे। इन कृषि स्टार्टअप के लिए चुने गए स्टार्टअप से जुड़े युवाओं को दो माह का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। मंत्रालय की यह योजना प्रधानमंत्री की कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार और प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित करने और कृषि स्टार्टअप की मदद से कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के आह्वान का मूर्त रूप है।
इस योजना में चुने गए नवाचारों को 1,185.90 लाख वित्तीय सहायता किश्तों के रूप में दी जाएगी। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ ही खेती और उससे संबंद्ध कार्यों में हाईटेक टेक्नोलॉजी का प्रयोग बढ़ेगा। यह सभी नए स्टार्टअप फूड प्रोसेसिंग खेती के उन्नत तरीकों और बीज बैंक तथा खाद्य पदार्थों के संरक्षण के व्यवसायों से जुड़ें होने के कारण इसके फलस्वरूप किसान को उसके उत्पाद का सही मूल्य प्राप्त हो सकेगा। इसके लिए मंत्रालय, उपकरणों और डिजाइनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए साल में दो बार हैकथान का भी आयोजन करेगा।
जिससे भारतीय युवाओं के नए विचारों को हाइटेक सिस्ट्म के तहत अपनाया जा सके। इसके अलावा मंत्रालय के स्तर पर कृषि के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और कृषि आधारित गतिविधियों के लिए नई तकनीकों के विकसित करने और जल्द से जल्द इन्हें अपनाने के लिए भी विभिन्न विभागों और योजनाओं से जुड़ी नोडल व्यवस्था को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
युवाओं को रोजगार से जोड़ने की योजना के बारे में केंद्रीय कृषि कल्याण, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया नवचार और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए इनोवेशन एंड एग्री- एंटरप्रेन्योरशिप डेवलमेंट कार्यक्रम को अलग से जोड़ा गया है। इसके तहत ज्यादा स्टार्टअप को वित्तीय सहायता दी जाएगी।