केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का आंदोलन जारी है। अब इस प्रदर्शन में किसानों को मजदूर संगठनों का साथ मिलता हुआ नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में दोनों संगठन मिलकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन करेंगे।
किसानों के समर्थन देने की अपील के बाद मंगलवार को 11 मजदूर संगठन इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूसीयूसी), ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी), स्वरोजगार महिला संघ (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) बैठक करेंगे। इसमें आगामी रणनीति को लेकर चर्चा की जाएगी।
किसान नेता हन्नान मौला ने अमर उजाला से कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी ट्रेड यूनियनों को एक पत्र भेजा है। हमने सभी श्रमिक संगठनों से किसानों का साथ देने की अपील की है। मंगलवार को सभी ट्रेड यूनियनों की बैठक होगी। इसके बाद किसान संगठन और मजदूर संगठनों की बैठक होगी। इस बैठक में हम तय करेंगे कि सरकार के खिलाफ कब आंदोलन करना है। आज हम लोगों का दुश्मन एक है इसलिए हम चाहते है कि दोनों मिलकर सरकार के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाए।
राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के चंडीगढ़ के अध्यक्ष नसीब जाखड़ ने अमर उजाला को बताया कि मंगलवार को सभी ट्रेड यूनियनों में आगे की रूपरेखा तय होगी। हम किसानों के साथ हैं। भारत बंद आंदोलन के दौरान भी हमने किसानों का साथ दिया था। किसानों के समर्थन में अभी रैलियां निकाल रहे हैं। आगे भी किसान संगठनों की तरफ से जो भी कार्यक्रम होंगे हम उन्हें पूरा समर्थन देंगे।
उन्होंने आगे कहा कि आज केंद्र सरकार अपनी योजनाओं का शिकार गरीब, मजदूर, किसान व मध्यम वर्ग को बनाने में जुटी हुई है। आज देश में महंगाई चरम पर पहुंच गई है। केंद्र सरकार ने सरकारी उपक्रमों का निजीकरण करने की तैयारी कर ली है। इससे देशभर में ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा। ऊपर से केंद्र सरकार श्रम कानून में बदलाव कर मजदूरों के अधिकारों को छिनने में लगी हुई है जिसे श्रमिक संगठनों ने कई आंदोलन और लंबे संघर्ष से प्राप्त किया था।