2018 में दो लाख उम्मीदवारों ने आईआईएम में प्रवेश के लिए कैट की परीक्षा दी थी। उसमें से 11 उम्मीदवार 100 प्रतिशत के क्लब में शामिल हुए हैं। यह सभी पुरुष इंजीनियर हैं कोई भी महिला इस क्लब में अपनी जगह बनाने में कामयाब नहीं रही है। जबकि पिछले साल दो लड़कियों और दो नॉ़न इंजीनियर उम्मीदवार इस क्लब में शामिल होने में सफल रहे थे।
पहली बार परीक्षा देने वाले चार ट्रांसजेंडर्स को आईआईएम कलकत्ता, आईआईएम कोझिकोड से फोन आया था। जिसमें से दो को शॉर्टलिस्ट किया गया है। महाराष्ट्र के पास डिस्टिंकशन (श्रेष्ठता) है, उसके सात उम्मीदवार 100 प्रतिशत अंक लाए हैं। इसके अलावा दो छात्र पश्चिम बंगाल के जाधवपुर विश्वविद्यालय से और दो कोझिकोड और बिहार से हैं। इस साल सबसे ज्यादा संख्या में लड़कियों ने कैट की परीक्षा दी थी लेकिन उनमें से कोई भी 100 प्रतिशत के क्लब में अपनी जगह नहीं बना पाई।
महाराष्ट्र के सात टॉपर्स में से तीन कोचिंग क्लास के टीचर्स हैं जिसमें पैट्रिक डिसूजा और सुनीता खुम्बाट शामिल हैं। इन सभी ने कैट की परीक्षा इसके बदले हुए पैटर्न को समझने के लिए दी थी। राज्य से 100 प्रतिशत क्लब में जगह बनाने वाले दूसरे छात्रों के नाम हैं- अमित बिक्रम, जगेश गोलवाला, रौनक मजूमदार और रितेश मनचंदा।
टॉप 11 की सूची में एक उम्मीदवार आईआईटी बॉम्बे के अंतिम वर्ष का छात्र जगेश गोलवाला है। रौनक मजूमदार आईआईटी कानपुर का एल्युमनाई और ठाणे का रहने वाला है। टॉप 21 की बात करें तो उसमें भी सभी पुरुष हैं जिन्होंने 99.99 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। इनमें से 19 इंजीनियर हैं। प्रत्येक आईआईएम ने अपने स्नातकोत्तर कार्यक्रम (पीजीपी) के लिए शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों की सूची जारी की है।
पोवाल इंस्टीट्यूट और दूसरे इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट जैसे कि वीजेटीआई और आईसीटी के छात्रों ने इस साल 99 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। यदि अंकों को देखें तो परिणाम इस साल 10-12 प्रतिशत नीचे गिरा है। इस साल 155 उम्मीदवारों ने 99 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं जबकि पिछले साल यह संख्या 174 थी। इसी तरह का ट्रेंड 98.95 और 90 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्रों में देखा गया है। एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के चीफ मेंटर हेमंग पंचमटिया ने कहा, 'क्वांटम सेक्शन काफी मुश्किल था जिसकी वजह से अंकों में गिरावट आई है।'