केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पहलगाम आतंकी हमले के जबाव में भारत के मजबूत, सफल और निर्णायक 'ऑपरेशन सिंदूर' पर मंगलवार को लोकसभा में हुई विशेष चर्चा में भाग लिया। उन्होंने कहा, पहले हर साल पत्थरबाजी में ही 100 से अधिक लोग मारे जाते थे, अब वह संख्या जीरो है। मोदी सरकार जनता, संसद और देशहित के प्रति जवाबदेह है। कश्मीर में 2004 से 2014 के बीच 7217 आतंकवादी घटनाएं हुई थीं, जबकि 2015 से 2025 के बीच 2150 आतंकवादी घटनाएं हुईं। आतंकवादी घटनाओं में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। शाह ने कहा, पहलगाम हमले की जांच की शुरूआत में मृतकों के परिजनों से चर्चा की गई। इसके बाद पर्यटकों, खच्चर वालों, पोनी वालों, फोटोग्राफर, कर्मचारियों और दुकानों में काम करने वाले कुल 1055 लोगों से 3000 घंटों से भी अधिक लंबी पूछताछ की गई। ये सब वीडियो पर रिकॉर्ड है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर आतंकियों के स्केच बनाए गए थे। 22 जून, 2025 को बशीर और परवेज की पहचान की गई, जिन्होंने पहलगाम हमले के अगले दिन आतंकियों को शरण दी थी। उन्होंने कहा कि बशीर और परवेज को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने खुलासा किया कि 21 अप्रैल, 2025 की रात को 8 बजे तीन आतंकी इनके पास आए थे। उनके पास एके 47 और एम 9 कार्बाइन थी। शाह ने सदन को बताया, बशीर और परवेज की मां ने भी तीनों मारे गए आतंकियों को पहचान लिया है। अब एफएसएल से भी इस बात की पुष्टि हो गई है। उन्होंने कहा कि यही तीनों पहलगाम हमले में शामिल आतंकी थे और इस हमले में इनके पास से मिली 2 ए के 47 और एक एम 9 कार्बाइन का उपयोग हुआ था। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि देश के पूर्व गृह मंत्री ने सवाल उठाया था कि क्या ये आतंकी पाकिस्तान से आए थे।
बतौर अमित शाह, हमारे पास सारे सबूत है कि ये तीनों पाकिस्तानी थे क्योंकि तीन में से दो आतंकियों के पाकिस्तानी वोटर नंबर भी उपलब्ध हैं, राइफलें भी उपलब्ध हैं। इनके पास से मिली चॉकलेट्स भी पाकिस्तान में बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के सामने देश का पूर्व गृह मंत्री पाकिस्तान को क्लीन चिट दे रहा है और ऐसा कर ये सवाल भी खड़ा कर रहे हैं कि हमने पाकिस्तान पर हमला क्यों किया था। पूरी दुनिया ने, जहां जहां हमारे सांसद गए थे, यह स्वीकारा है कि पहलगाम आतंकी हमला पाकिस्तान ने किया था। उन्होंने कहा कि देश के पूर्व गृह मंत्री इस बात का सबूत मांगते हैं लेकिन पाकिस्तान को बचाने का इनके इस षड्यंत्र को आज देश की 140 करोड़ जनता जान गई है।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 2004 से 2014 के बीच 1770 नागरिकों की मृत्यु हुई, जबकि 2015 से 2025 के बीच यह संख्या 357 रही, जो 80 प्रतिशत की कमी है। 2004 से 2014 के बीच 1060 सुरक्षा कर्मियों की मृत्यु हुई, जबकि 2015 से 2025 के बीच 542 सुरक्षा कर्मियों की मृत्यु हुई। हमारी सरकार के समय पिछली सरकार की तुलना में आतंकवादियों की मृत्यु में 123 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जिस धारा 370 को विपक्षी पार्टी की सरकारों ने लंबे समय तक बचा कर रखा, उस धारा 370 के हटने से कश्मीर में आतंकवादी इकोसिस्टम नष्ट हुआ है। अमित शाह ने कहा कि हमारी सरकार ने जीरो टेरर प्लान बनाया है, एरिया डोमिनेशन प्लान बनाया है, मल्टीलेवल डिप्लॉयमेंट किया है, सुरक्षा जेलें बनाई हैं, 98 प्रतिशत ट्रायल अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हो रही हैं। हमने संचार के साधन बनाए हैं और 702 फोन विक्रेताओं को जेल में डाला है और 2666 सिम कार्ड ब्लॉक किए हैं।
अब जो आतंकवादी जहां मारा जाता है, उसे वहीं दफना दिया जाता है। किसी भी आतंकवादी का महिमामंडन करने के लिए जनाजा निकालने की इजाजत नरेन्द्र मोदी के शासन में नहीं है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के सगे लोगों और समर्थकों को चुन-चुन कर हमने जेलों में डाला और उनके पासपोर्ट रद्द किए, साथ ही उन्हें मिले सरकारी ठेके रद्द कर दिए। 75 से ज्यादा आतंकी समर्थकों को अदालत से आदेश प्राप्त करके सरकारी नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। शाह ने कहा कि बार कांउसिल आतंकवादियों के समर्थकों से भरी थी, उसे सस्पेंड कर नया लोकप्रिय चुनाव हमने कराया और कई संगठन बैन किए। विशेष यूएपीए अदालत का गठन कर मार्च 2022 से 2025 के बीच यूएपीए के लगभग 2260 मामले हमने दर्ज किए। इसके अलावा 374 कुर्की भी की गई।
पहले संगठित रूप से पत्थरबाजी होती थी, अब इनकी संख्या जीरों हो गई है। पहले संगठित हड़ताल का पाकिस्तान से ऐलान होता था, कश्मीर घाटी में बंद होता था, लेकिन अब पाकिस्तान और घाटी में किसी की भी हिम्मत नहीं है कि ऐसा कुछ करे। विपक्षी पार्टी के शासनकाल में साल में 132 दिन घाटी बंद रहती थी, लेकिन पिछले तीन साल से संगठित हड़ताल की संख्या जीरो हो गई है। पहले पत्थरबाजी में हर साल 100 से अधिक लोग मारे जाते थे, अब नागरिकों की मृत्यु और उनके घायल होने की संख्या जीरो हो गई है।
एक समय हुर्रियत के नेताओं को यहां वीआईपी ट्रीटमेंट मिलता था, हुर्रियत के साथ चर्चा होती थी, हुर्रियत वाले आते थे तो रेड कारपेट बिछाते थे। लेकिन हमने हुर्रियत के सारे कंपोनेंट बैन कर दिए हैं और उनके सभी नेता जेल की सलाखों के पीछे हैं। हम हुर्रियत से कोई बात नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि वह सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की नीति को दोहराना चाहते हैं कि हुर्रियत आतंकवादी संगठनों का आउटफिट है और हम उनसे बात नहीं करेंगे, हम घाटी के युवाओं से बात करेंगे।