अपनी शुरुआत के दस साल बाद भारत में राष्ट्रीय डिजिटल आइडेंटिटी सिस्टम यानी बायोमीट्रिक आधार यूआईडी का फैलाव देशव्यापी हो चुका है। इसके बावजूद बहुत बड़ी संख्या में बेघर और ट्रांसजेंडर लोग आज भी इस व्यवस्था से महरूम हैं और उन्हें बहुत सारी आवश्यक सेवाओं से वंचित होना पड़ रहा है। इस बात का दावा एक नए अध्ययन में किया गया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आधार से महरूम रहने वाले लोगों में उत्तर-पूर्वी राज्य असम के भी 90 फीसदी नागरिक शामिल हैं, जहां अगस्त में जारी किए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के फाइनल प्रारूप में करीब 20 लाख लोगों को देश का नागरिक नहीं माना गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में वंचित वर्ग के सबसे ज्यादा वंचित वर्ग के लोगों में से अधिकतर के पास आधार कार्ड होने की संभावना कम है और उनके आधार डाटा में त्रुटि होने की संभावना बहुत ज्यादा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आधार डाटा में त्रुटि भी एनआरसी से इन लोगों के वंचित रहने का बड़ा कारण है।