कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि हत्या से संबंधित आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्तियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामलों को फिर से शुरू किया जाए। पश्चिम बंगाल सरकार ने 2020 में मुकदमों को वापस ले लिया था। कोर्ट ने सरकार के फैसले को कानून की नजर में खराब करार दिया।
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2007 में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान नंदीग्राम और खेजुरी में दर्ज 10 हत्या के मामलों को फिर से शुरू किया जाएगा। कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि हत्या से संबंधित आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्तियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामलों को फिर से शुरू किया जाए। पश्चिम बंगाल सरकार ने 2020 में मुकदमों को वापस ले लिया था। कोर्ट ने सरकार के फैसले को कानून की नजर में खराब करार दिया।
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न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक और न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि मामलों को पुनर्जीवित करने के लिए अभियोजन पक्ष द्वारा उचित कदम उठाए जाएं। पीठ ने कहा कि दस आपराधिक मामलों के आरोपियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत अभियोजन वापस लेने की अनुमति देना सार्वजनिक हित में नहीं होगा। इससे सार्वजनिक नुकसान और क्षति होगी।
कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 321 को लागू करने के राज्य के फैसले को कानूनी या वैध नहीं कहा जा सकता है। जब सांविधानिक प्रावधान किसी भी राज्य को किसी भी तरीके या रूप में हिंसा को हतोत्साहित करने के लिए बाध्य करते हैं, तो इसकी राजनीतिक हिंसा को नजरअंदाज करने के रूप में गलत व्याख्या किए जाने की संभावना है।
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पीठ ने कहा कि समाज में किसी भी प्रकार की हिंसा का उन्मूलन एक आदर्श है। इसके लिए राज्य को प्रयास करना चाहिए। लोकतंत्र में चुनाव से पहले या बाद में किसी भी तरीके या रूप में हिंसा से बचना चाहिए। किसी भी राज्य को किसी भी प्रकार की हिंसा के प्रति शून्य सहिष्णुता प्रदर्शित करनी चाहिए। पीठ ने कहा कि 2007 में नंदीग्राम और पूर्वी मेदिनीपुर जिले के खेजुरी में अलग-अलग घटनाओं में दस से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई थी। ऐसी घटनाओं में आपराधिक मामलों को सीआरपीसी की धारा 321 के तहत शांति और शांति की वापसी के आधार पर वापस लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले को रद्द करते हुए पीठ ने कहा कि आपराधिक मामलों के प्रभारी लोक अभियोजक जहां सीआरपीसी की धारा 321 के तहत आवेदन की स्वीकृति के आदेश पारित किए गए थे, इस फैसले और आदेश की तारीख से एक पखवाड़े के भीतर उचित कदम उठाएंगे।