राजू एक दिन रेडियो सुन रहा था। उसकी पत्नी उससे कुछ बोल रही थी जिसपर वो कोई ध्यान नहीं दे रहा था।  उसकी पत्नी से रहा नहीं गया और उसने राजू से कहा- क्या सुन रहे हो जी, इतने गौर से। राजू- नेताजी के मन की बात। रजिया- मेरी मन की बात तो कभी इतने ध्यान से नहीं सुनी। राजू- अरे पगली! वो मन की बात नहीं बल्कि मन की भड़ास होती है।