मोहब्बत के खर्चो की बड़ी लंबी कहानी है, कभी फिल्म दिखानी है तो कभी शोपिंग करानी है, मास्टर रोज कहता है कहाँ है फीस के पैसे? उसे समझाऊं मैं कैसे की मुझे छोरी पटानी है!! ना वक्त इतना हैं कि सिलेबस पूरा किया जाए, ना तरकीब कोई की एग्जाम पास किया जाए, ना जाने कौन सा दर्द दिया है इस पढ़ाई ने, ना रोया जाय और ना सोया जाए।