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Una News: गेहूं की फसल खेतों में होने लगी खराब, पैदावार में गिरावट तय

Sat, 21 Mar 2026 12:21 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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ऊना। जिले में बीते एक सप्ताह से लगातार खराब मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। तेज हवाओं और लगातार हो रही बारिश के चलते खेतों में खड़ी गेहूं की फसल अब बर्बादी की कगार पर पहुंच गई। खासकर सिंचित क्षेत्रों में जहां इस बार गेहूं की फसल अच्छी तैयार हुई थी, वहां अब करीब 30 फीसदी तक पैदावार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
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जानकारी के अनुसार जिला के ऊना, हरोली, गगरेट और अंब के अधिकतर गांवों में पहले तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल खेतों में गिर गई। वहीं बीते रविवार से लगातार हो रही बारिश गिरी हुई फसल के लिए जहर साबित हो रही है। खेतों में बिछी फसल पर पानी गिरने से गेहूं की नली और दाने सड़ने लगे हैं। इसका उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
किसानों ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल रहने के कारण गेहूं की फसल शानदार स्थिति में थी और अच्छी पैदावार की उम्मीद थी लेकिन अचानक बदले मौसम ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर के अनुसार, गिरी हुई फसल पर लगातार नमी रहने से दाना खराब हो सकता है। इससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार पर असर पड़ेगा। इसके अलावा खेतों में पानी जमा होने से कटाई कार्य भी प्रभावित होगा और फसल के पूरी तरह खराब होने का खतरा बना रहेगा।
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गेहूं की फसल अच्छे तरीके से तैयार थी लेकिन तेज हवा के चलते फसल गिर गई और अब बारिश के कारण दाने खराब होने लगे हैं। उनकी खेतों में 30 प्रतिशत से अधिक फसल खराब होना तय है। कई किसानों के तो पूरे खेत में फसल बिछ गई है। उन्हें तो खाने के लिए बाजार से दाने व आटे की खरीद करनी पड़ेगी।
-बलबीर चंद, किसान गांव पंडोगा
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अगर मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ सकता है। जब बारिश की आवश्यकता थी, उस समय बारिश नहीं हुई। दाना पड़ने के समय भी बारिश वरदान से कम नहीं लेकिन साथ में चली तेज हवाओं ने कहर बरपाया, जिसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
कमल, किसान गांव खड्ड
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गिरी हुई फसल में पानी भरने से फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। जिस समय फसल को दाना पड़ रहा था, ठीक उसी समय बारिश होने से उत्पादन गिरना तय है। अगर दाना पड़ने के बाद ऐसा मौसम होता तो फिर भी दाने तैयार होने की उम्मीद रहती है।
राज कुमार ठाकुर, किसान हरोली
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इस बार फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है। चार महीने कई बार खाद और कीटनाशकों पर खर्च करने के बाद भी किसानों के हाथ खाली हैं। अगर यूं ही हर फसल में नुकसान बढ़ता रहा तो किसान गुजारे लायक ही फसल तैयार कर अन्य कारोबार को करने पर विवश हो जाएंगे।
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रोहित कुमार, किसान
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