ऊना। परमात्मा के संबंध में जानने से पहले हमें अपने अस्तित्व को समझना पड़ेगा। क्योंकि वृक्ष की क्या पूछताछ करना जब हमें बीज का ही ज्ञान न हो। बिना बीज को बोए हम वृक्ष को नहीं देख सकते। दूसरे के परमात्मा को नहीं देखा जा सकता। हमारे भीतर छिपा हुआ बीज जब टूट करके वृक्ष बनेगा तभी हम उसे देख पाते हैं। उक्त अमृत वचन श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन अतुल कृष्ण जी महाराज ने शिव मंदिर, पंगलू में कहे।
उन्होंने कहा कि नास्तिक को हराना बहुत मुश्किल है। नास्तिक को आज तक कोई नहीं हरा पाया। इसका कारण यह नहीं है कि नास्तिक सही है। इसका कारण मात्र यह है कि वह गलत ही प्रश्न पूछ रहा है। जो भी जवाब दिए जाएंगे वह व्यर्थ होंगे। कथा में ध्रुव जी का चरित्र, भक्ति की महिमा, राजा प्रियव्रत की कथा एवं जड़ भरत जी का चरित्र सभी ने प्रसन्न मन से श्रवण किया।
इस अवसर पर ठाकुर मान सिंह, प्रकाश चंद्र, सुभाष चंद्र, राजेंद्र पाल सिंह, कुलभूषण सिंह, साहिल ठाकुर, निखिल ठाकुर, कृशांश ठाकुर, करतार सिंह राणा, पंकज मोहन, देशबंधु, रामपाल, रुपिंद्र सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।