घनारी (ऊना)। पहलगाम हमले की निंदा करते हुए 1971 युद्ध के वीरचक्र विजेता कैप्टन सुखदेव सिंह ने कहा कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते। इनका नामोनिशान मिटाना ही पड़ेगा। मवां कहोलां निवासी 85 वर्षीय योद्धा ने याद दिलाया कि 1971 में उन्होंने पाकिस्तानी सेना के ग्रेनेड को हवा में ही कैच कर उन्हीं की मशीनगनों को नष्ट किया और दुश्मनों को मौत के घाट उतारा। उन्होंने कहा-आज भी खून खौल रहा है, सरकार कहे तो दुश्मनों को सबक सिखाने चल दूं। वहीं, कारगिल युद्ध में शौर्य चक्र से सम्मानित कैप्टन सुशील कुमार (सेवानिवृत्त) ने भी उम्र के इस पड़ाव में कायर पाकिस्तानियों से लोहा लेने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि ये मक्कार व कायर लोग हैं और ईंट का जवाब पत्थर वाली भाषा से ही समझते हैं। संवाद