ऊना। लगातार हो रही बारिश और प्रतिकूल मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कई क्षेत्रों में आलू की फसल सड़न की चपेट में आ गई है जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। करीब चार महीने की कड़ी मेहनत के बाद तैयार हुई फसल अब खेतों में ही खराब होती नजर आ रही है।
जानकारी के अनुसार जिला में करीब 1000 हेक्टेयर जमीन पर आलू की चार माह वाली फसल तैयार हो रही है। वर्तमान में अत्यधिक नमी और जलभराव के कारण आलू की फसल में तेजी से सड़न फैल रही है। खेतों में पानी भर जाने से कंदों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही जिसके चलते वे गलने लगे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मौसम खराब रहने की वजह से किसान समय पर कीटनाशकों का छिड़काव नहीं कर सके। लगातार बारिश के कारण दवाओं का असर भी कम हो गया जिससे फसल पर रोगों का प्रकोप बढ़ गया। नमी भरे वातावरण ने फफूंद और अन्य रोगों को तेजी से फैलने का मौका दिया। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने किसानों को जल निकासी की बेहतर व्यवस्था करने, खेतों में पानी जमा न होने देने और मौसम साफ होते ही आवश्यक दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी है।
आलू की खेती में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर भारी खर्च आता है। ऐसे में फसल खराब होने से उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही। एक तरफ लागत डूब रही है तो दूसरी तरफ बाजार में बिक्री से होने वाली आय भी प्रभावित हो रही है।
-सतीश कुमार, किसान
सरकार और प्रशासन किसानों को फसल को हुए नुकसान का मुआवजा दे। प्राकृतिक आपदा के कारण हुए इस नुकसान की भरपाई के लिए उचित आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। साथ ही फसल बीमा योजनाओं का लाभ भी जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाया जाए।
-अमित कुमार, किसान