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ऊना में बैंबू हब बनने की क्षमता : योगेश शिंदे

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ऊना। बैंबू इंडिया के संस्थापक योगेश शिंदे ने जिले में बैंबूना प्रोजेक्ट तक बनाए स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के साथ भेंट कर उन्हें टिप्स दिए।
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शिंदे ने बौल, लमलैहड़ी और धगड़ूंह में बांस के उत्पादों से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बौल में बैंबू आर्ट गैलरी का निरीक्षण भी किया। इस दौरान पीओ डीआरडीए संजीव ठाकुर और महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र अंशुल धीमान भी उनके साथ रहे। शिंदे ने कहा कि जिले में बैंबू हब बनने की पूरी क्षमता है। यहां का बांस अच्छा है। इससे कई तरह के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऊना जिले में बांस के उत्पाद बनाने के काम को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए वे हर संभव मदद देंगे। योगेश ने बांस उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए विभागों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।
उन्होंने कहा कि बांस पर्यावरण मित्र उत्पाद है। इससे तैयार होने वाले उत्पाद पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते। शिंदे ने बताया कि वर्ष 2016 में उन्होंने बैंबू इंडिया कंपनी की शुरुआत की थी। आज उनकी कंपनी बांस के ऐसे उत्पाद बनाती है, जो प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने में सहयोग देते हैं।
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डीसी राघव शर्मा ने कहा कि जिले में तैयार हो रहे बांस के उत्पादों की मार्केटिंग में बैंबू इंडिया के योगेश शिंदे की सहायता ली जा रही है। जिला प्रशासन बांस के उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग कर इस काम में लगे स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में काम कर रहा है। जिले में बांस के उत्पाद निर्मित कर स्वरोजगार की अपार संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने बांस को पेड़ों की श्रेणी से हटाकर घास की कैटेगरी में रखा है। इससे अब इसे काटने और इसके ट्रांसपोर्टेशन के लिए किसी भी तरह की अनुमति नहीं लेनी होती है।
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