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Una News: गेहूं में दाना पड़ने के बाद नहीं हुई बारिश, पैदावार घटने की आशंका

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गैर सिंचित इलाकों में बीते कई दिनों से बारिश का इंतजार
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एपीएमसी ने गेहूं खरीद के लिए जिले में बनाए हैं दो केंद्र

भवन निर्माण कार्यों के लिए भी पानी मुहैया करवाना बना चुनौती



संवाद न्यूज एजेंसी



ऊना। जिले में इस बार गेहूं की पैदावार में गिरावट हो सकती है। खासकर गैर सिंचित इलाकों में बारिश की कमी के चलते फसल प्रभावित होना तय है। ऐसे इलाके यहां सिंचाई सुविधा नहीं है, वहां फसल बिल्कुल सूख चुकी है। फसल को दाना पड़ने के बाद से बारिश नहीं हुई है। इस वजह से दाना पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया। जबकि, सिंचाई सुविधा संपन्न इलाकों में अभी फसल का कुछ हिस्सा हरा है।



जानकारी के मुताबिक ऊना में करीब 35000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल उगाई जाती है। औसतन हर वर्ष 80 हजार मीट्रिक टन के करीब गेहूं की पैदावार और करीब आठ लाख क्विंटल पशु चारा (तूड़ी) निकलती है। इस वर्ष फसल की बिजाई के बाद करीब दो माह तक बारिश नहीं हुई। इससे फसल के उगने और विकसित होने पर बुरा असर हुआ। इसके बाद जनवरी के अंतिम दिनों, फरवरी और मार्च में बारिश हुई। इससे फसल को काफी सहारा मिला। किसानों ने भी राहत की सांस ली। मध्य मार्च से फसल का दाना विकसित होने लगता है। इस दौरान किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार रहता है लेकिन बारिश नहीं हुई। गैर सिंचित इलाकों में फसल की पैदावार 40 फीसदी तक गिर सकती है। जबकि सिंचित इलाकों में फसल की स्थिति अच्छी है।
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जिला ऊना के रामपुर और टकारला गेहूं क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इन मंडियों में गेहूं खरीद प्रक्रिया 15 जून तक चलेगी। रामपुर और टकारला क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। गेहूं की सफाई के लिए मशीनों की मरम्मत भी करवा ली गई है, लेकिन अभी तक गेहूं की फसल तैयार नहीं हो पाई। इस वर्ष गेहूं खरीद का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,425 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए www.hpappp.nic.in पोर्टल पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।
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उपनिदेशक जिला कृषि विभाग कुलभूषण धीमान ने बताया कि सिंचाई सुविधा वाले मैदानी इलाकों में गेहूं शानदार तरीके से तैयार है। हालांकि, जिला में 60 फीसदी फसल गैर सिंचित इलाकों में होती है। कहा कि मौसम से प्रभावित फसल में पैदावार गिरने की संभावना होती है। इसको लेकर फसल कटाई के दौरान ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
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