बंगाणा (ऊना)। बंगाणा में राष्ट्रीय किसान संगठन की बैठक में निर्धन वर्ग के हितों की रक्षा को लेकर जोरदार चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय किसान संगठन के महामंत्री देशराज मोदगिल ने की।
उन्होंने हाल ही में प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिसमें आगामी फरवरी माह तक सभी सरकारी जमीनों को खाली करने के निर्देश जारी किए गए हैं। देशराज मोदगिल ने कहा कि यह फैसला किसान, मजदूर, बागवान और निर्धन वर्ग के लिए अत्यंत अन्यायपूर्ण है।
प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह इस आदेश पर तत्काल रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे। निर्धन वर्ग की पीढ़ियों की मेहनत और आश्रय इस आदेश से खतरे में आ गए हैं।
बैठक में वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2002 में प्रदेश सरकार ने एक नीतिगत निर्णय लेते हुए निर्धन वर्ग, किसानों और मजदूरों को सरकारी भूमि पर रिहायशी मकान, पशुशालाएं और अन्य आवश्यक ढांचे पर किए गए कब्जों को नियमित करने की अनुमति दी थी।
इस फैसले का उद्देश्य उन परिवारों को स्थायी आवास और आजीविका का साधन प्रदान करना था जिनके पास निजी जमीन नहीं थी। इसी नीति के तहत हजारों निर्धन परिवारों ने अपने घर और पशुशालाएं बनाई थीं लेकिन अब हाई कोर्ट का हालिया आदेश उनके जीवन में भारी संकट खड़ा कर रहा है। राष्ट्रीय किसान संगठन ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो यह आदेश हजारों परिवारों को बेघर कर देगा और सामाजिक अस्थिरता पैदा करेगा। संगठन ने चेतावनी दी कि निर्धन वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेंगे।
बैठक में महामंत्री देशराज मोदगिल के साथ मेला राम, ज्ञानचंद, केवल कुमार, करम सिंह सहित निर्धन वर्ग के कई लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि प्रदेश सरकार हाई कोर्ट से इस आदेश को स्थगित करवाए और निर्धन वर्ग को कानूनी सुरक्षा प्रदान करे।