चरणगंगा में पवित्र धूने पर शाश नवाते श्रद्धालु।। संवाद
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अंब (ऊना)। डेरा बाबा बड़भाग सिंह जी मैड़ी होली मेला के दूसरे दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगवाई। क्षेत्र के डेरा बाबा बड़भाग सिंह जी बेरी साहिब, गुरुद्वारा मंजी साहिब, कुज्जासर, मंदिर वीर नाहर सिंह जी और पवित्र चरण गंगा श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र हैं। इसके साथ साथ विभिन्न धार्मिक संस्थाओं की ओर से बनाए गए डेरों में भी खूब रौनक है। वैसे तो क्षेत्र के हर धार्मिक स्थल के साथ बाबा जी कि किवदंतियां जुड़ी हैं लेकिन क्षेत्र में चरण गंगा ही ऐसा स्थान है, जहां स्नान और धूने का भी महत्व है। धौलीधार सेवा सोसायटी के महंत शादीलाल गोस्वामी के अनुसार कलियुग में वीर नाहर सिंह जी में भगवान हनुमान और भैरों की शक्तियां समाहित मानी गई हैं। बाबा बड़भाग सिंह जी ने उन्हें वश में करके एक पिंजरे में कैद कर लिया था। उनके माफी मांगने पर बाबा जी ने वीर नाहर सिंह से वचन लिया था कि वह लोगों को तंग नहीं करेंगे और अपनी शक्तियों का उपयोग लोगों के दुख दूर करने के लिए करेंगे। चरण गंगा (धौलीधार) में उनका धूना लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। मान्यता है कि चरण गंगा में स्नान करने से बुरी आत्माओं से मुक्ति मिलती है। धूने में माथा टेकने से मन्नत पूरी होती है और दुख दूर होते हैं। चरण गंगा के बारे में किवदंती है कि यह कई ऋषियों-मुनियों की तपस्या स्थली है। वीर नाहर सिंह जी के आशीर्वाद से यहां लोगों को प्रेतात्माओं के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। जादू-टोना का प्रभाव भी खत्म हो जाता है। मैड़ी के डेरा बाबा बड़भाग सिंह जी बेरी साहिब, गुरुद्वारा मंजी साहिब, कुज्जासर की भांति यहां झंडा चढ़ाए जाने की रस्म तो हर साल होली के मौके पर होती है लेकिन हर दो साल बाद झंडे की लकड़ी बदली जाती है। पुरानी लकड़ी को हटाकर नया झंडा लाया जाता है। झंडे को एक शुद्ध आत्मा का प्रतीक माना जाता है। नए झंडे के लिए छह महीने पूर्व ही सीधी चीड़ का पेड़ देखकर उस पर शगुन की डोरी एक कौड़ी के साथ बांध दी जाती है। फिर इस पेड़ को जिससे निकलने वाले झंडे की लंबाई औसतन 72 फीट होती है, उसे काटने के बाद साफ किया जाता है और रस्म के लिए तैयार किया जाता है। होली के दिन पुराना झंडा उतारकर उस नए झंडे को पूरे रीति रिवाज के साथ बीज मंत्रों के जाप के बीच पंचामृत से स्नान करवाया जाता है। इसके बाद उसे नया चोला (वस्त्र) पहनाया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार झंडे पर आकर्षक रूमाल, गुब्बारे, खिलौने भी बांधते हैं और मन्नतें मांगते हैं।