ऊना। मौसम की मार ने जिले के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। हाल ही में हुई तेज बारिश और अंधड़ के कारण खेतों में बिछी गेहूं की फसल अब संभलती नजर नहीं आ रही। धूप निकलने के बावजूद हालात में सुधार न होने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि जो फसल जमीन पर बिछ चुकी है, उसमें अब दाना भरने की संभावना बेहद कम रह गई है। ऐसे में इस बार गेहूं की पैदावार में गिरावट लगभग तय मानी जा रही है। कई इलाकों में फसल पूरी तरह खेतों में बिछ गई है, जिससे नुकसान और अधिक बढ़ गया है। वहीं, जिला कृषि विभाग ने नुकसान को गंभीरता से लेते हुए सर्वेक्षण शुरू कर दिया है।
किसान राकेश कुमार, सतवीर सिंह, करण सिंह, अरविंद कुमार और जसवीर सिंह के अनुसार, फसल के पकने के समय इस तरह गिरने से दाना बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है, जो दाना बनता भी है, उसकी गुणवत्ता काफी खराब रहती है, जिससे बाजार में उचित मूल्य मिलना भी मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने बताया कि पहले मौसम की मार से गैर सिंचित क्षेत्रों में फसल प्रभावित हुई थी और अब सिंचित क्षेत्रों में भी तैयार फसल गिरने से नुकसान बढ़ गया है।
मुआवजे की मांग
किसानों ने सरकार से मांग की है कि जल्द नुकसान का आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें।
अब रोग का भी खतरा
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस समय फसल का गिरना सबसे अधिक नुकसानदेह होता है। इससे दाना बनने की प्रक्रिया रुक जाती है और अधिक नमी के कारण फसल में सड़न और रोग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।
विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर गिरी फसल का आकलन कर रही हैं, ताकि नुकसान की सटीक रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जा सके। डॉ. प्रेम ठाकुर, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग