दौलतपुर चौक (ऊना)। अमलैहड़ स्थित डेरा बाबा रुद्रानंद आश्रम अच्युतानंद में आयोजित भागवतकथा ज्ञान यज्ञ में रविवार को राष्ट्रीय संत गौरदास महाराज ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया।
कथा व्यास गौरदास ने कहा कि माता रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व मानती थी। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को मन ही मन अपना पति स्वीकार कर लिया था। जब रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ करने का निर्णय लिया तो वह अत्यंत व्यथित हो गईं और भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर सहायता की प्रार्थना की।
रुक्मिणी की भक्ति और पूर्ण समर्पण से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंचे और विवाह से पूर्व ही रुक्मिणी का हरण कर उन्हें अपने साथ ले गए। इसके पश्चात दोनों का वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न हुआ। कथा व्यास ने संदेश दिया कि जो भक्त सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। इस अवसर पर गगरेट के विधायक राकेश कालिया और एडवोकेट अश्वनी अरोड़ा उपस्थित रहे। संवाद