ऊना। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते समय मेडिकल की शर्त जरूरी है। जाहिर है कि मेडिकल में भी डॉक्टर यही देखते हैं कि क्या ड्राइविंग लाइसेंस पाने वाले की आंखों की रोशनी सामान्य है, उसका कद सामान्य है, वह मानसिक तौर पर ठीक है, उसके शारीरिक अंग ठीक हैं, उसे मिरगी के दौरे तो नहीं पड़ते।
सोमवार को सिविल अस्पताल गगरेट में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मेडिकल करवाने आए एक व्यक्ति को डॉक्टर ने इतने टेस्ट लिख दिए कि उन्हें देखकर ही वह चकरा गया।
उसे समझ ही नहीं आया कि वह ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मेडिकल करवाने आया है या फिर सेना में भर्ती होने जा रहा है।
सोमवार को उपमंडल अंब के स्तोथर गांव के सोम दत्त ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए मेडिकल करवाने सिविल अस्पताल गगरेट पहुंचे।
यहां उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए मेडिकल करवाने को दो सौ रुपये की फीस जमा करवा पर्ची कटवाई। जब वह डॉक्टर के पास उस पर्ची को लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने उन्हें कंपलीट ब्लड काउंट (सीबीसी), लिवर फंक्शनिंग टेस्ट (एलएफटी), रीनल फंक्शनिंग टेस्ट (आरएफटी), हृदय की जांच करने के लिए ईसीजी, टीबी का टेस्ट करवाने की सलाह दे डाली। इतने सारे टेस्ट देखकर सोम दत्त चकरा गए।
सोम दत्त के अनुसार उनका स्वास्थ्य ठीक है और उन्हें कोई परेशानी नहीं लेकिन एक लाइसेंस के लिए इतने सारे टेस्ट अगर लिख दिए जाएंगे तो बनवाने आया व्यक्ति सुनकर ही बीमार हो जाएगा।
उधर खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज पराशर का कहना है कि वह अभी इस बाबत ऑर्डर निकाल रहे हैं। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए जो जरूरी टेस्ट हैं, वहीं करवाए जाएंगे।