ऊना। कृषि विभाग ने नए सपनों की इमारत खड़ी करने से पहले अपनी पुरानी छत ही ढहा दी लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि करोड़ों की बिल्डिंग बनाने को कोई ठेकेदार तैयार नहीं। 5.96 करोड़ रुपये के भवन के लिए जनवरी से मई तक चार बार टेंडर निकाले गए, शर्तें बदली गईं, नियमों में ढील दी गई, मगर सरकारी काम के नाम पर ठेकेदारों ने दूरी ही बनाए रखी। नतीजा यह निकला कि अपना भवन गिराने वाला विभाग आज किराये की चहारदीवारी में सिमट गया है और नई इमारत अब सिर्फ फाइलों, नोटिंग और टेंडरों के चक्कर में घूम रही है। विभाग ने पिछले वर्ष जुलाई महीने में अपना पुराना भवन इस उम्मीद से डिस्मेंटल कर दिया कि 18 महीनों में नया भवन बना लेंगे लेकिन सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ठेकेदारों ने अपने हाथ खड़े कर लिए। फिलहाल कृषि विभाग का अपना भवन न होने से किसानों सहित विभाग के कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
चार बार टेंडर किए, हर बार आए दो ठेकेदार
कृषि विभाग ने अपने नए भवन के निर्माण को लेकर पहली बार इसी वर्ष 15 जनवरी को टेंडर किया। इसके बाद 17 फरवरी को दूसरी बार, 25 फरवरी के तीसरी बार और सात मई को चौथी बार टेंडर किया गया। 17 फरवरी के दिन टेंडर लेने के लिए एक भी ठेकेदार ने आवेदन नहीं किया, 15 जनवरी, 25 फरवरी और किए गए टेंडर के लिए दो ही ठेकेदारों ने आवेदन किया जबकि टेंडर आवंटन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अलग-अलग कंपनियों के दो से अधिक आवेदन की जरूरत होती है।
शर्तें बदलीं, फिर भी नहीं बनी बात
विभाग ने ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए टेंडर की कुछ शर्तों में बदलाव भी किए लेकिन उसके बाद भी हालात नहीं बदले। विभाग ने पहले किए टेंडर में शर्त रखी कि वहीं ठेकेदार टेंडर के लिए आवेदन कर सकता है जिसके पास भवन निर्माण का पांच वर्ष का अनुभव हो लेकिन दो ही आवेदन आए। ऐसे में विभाग ने शर्त में ढील देते हुए 40 प्रतिशत सिविल वर्क का अनुभव हो, वह भी आवेदन कर सकता है लेकिन इसका भी कोई असर नहीं दिखा।
नए भवन के निर्माण को लेकर सात मई को भी टेंडर किया गया था लेकिन इस बार भी दो ही आवेदन आए हैं। अब इसकी रिपोर्ट तैयार कर निदेशालय को भेज देंगे। वहां से जो दिशा-निर्देश जारी हाेंगे। उसके आधार पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-डॉ. प्रेम ठाकुर, उपनिदेशक, कृषि विभाग