चकसराय (ऊना)। बदलते मौसम के मिजाज ने इस बार बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बंपर पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे किसानों और ग्रामीणों को इस वर्ष निराशा हाथ लगी है। देसी आम की फसल खराब होने का सीधा असर बाजार पर दिखाई दे रहा है। आम की आवक कम होने के कारण इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। वर्तमान में बाजार में आम लगभग 100 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है। हालत यह है कि जो ग्रामीण पहले अपने पेड़ों से आम तोड़कर अचार तैयार करते थे, उन्हें इस बार बाजार से महंगे दामों पर आम खरीदने पड़ रहे हैं।
चकसराय क्षेत्र सहित आसपास के कई गांवों में लगातार बदलते मौसम का सबसे अधिक असर देसी आम की फसल पर पड़ा है। किसानों का कहना है कि इस बार करीब 80 प्रतिशत से अधिक फसल नष्ट हो चुकी है। कई पेड़ों पर आया बौर समय से पहले ही झड़ गए जबकि जो फल विकसित हुए थे, वे भी तेज हवाओं और बारिश की भेंट चढ़ गए।
अंब, गगरेट विकास खंड के विषय विशेषज्ञ एवं बागवानी विकास अधिकारी शिवभूषण के अनुसार, प्रतिकूल मौसम के कारण जिले में आम की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 150 मीट्रिक टन आम की फसल नष्ट होने का अनुमान है।
सतपाल सिंह का कहना है पहले गांव के हर रास्ते और खेत के किनारे देसी आम के पेड़ होते थे। गर्मियों में बच्चे पेड़ों के नीचे दिनभर खेलते और आम खाते थे। आज मौसम इतना बदल गया है कि पेड़ों पर फल टिक ही नहीं पाते। अगर यही हाल रहा तो आने वाली पीढ़ियां देसी आम को केवल कहानियों में ही जान पाएंगी।
सुभाष चन्द का कहना हैं कि हमारे समय में आम की इतनी पैदावार होती थी कि लोग रिश्तेदारों और पड़ोसियों को टोकरी भरकर देते थे। अब न तो पहले जैसे पेड़ बचे हैं और न ही मौसम पहले जैसा रहा है। सरकार और समाज को मिलकर देसी आम के पौधे लगाने चाहिए ताकि हमारी यह विरासत बची रह सके।