फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Una News: निजी स्कूलों की फीस में बढ़ोतरी से अभिभावकों की बढ़ीं मुश्किलें

विज्ञापन
विज्ञापन
अभियान शिक्षा 4
विज्ञापन

हर नए शैक्षणिक सत्र में 200 से 400 रुपये प्रति बच्चा बढ़ाई जा रही है फीस
अभिभावकों ने कहा, फीस के लिए निर्धारित होने चाहिए मापदंड
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत कर दी गई है। इसके चलते निजी स्कूलों ने भी फीस में लगातार बढ़ोतरी का क्रम जारी रखा है। इस शैक्षणिक सत्र में भी प्रति बच्चे के हिसाब से निजी स्कूलों में फीस 200 से 400 रुपये बढ़ाई गई है। निजी स्कूलों में शिक्षा विभाग और सरकार की ओर से फीस के मापदंड तय न होने की सूरत में हर वर्ष फीस की बढ़ोतरी का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। इससे निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे अभिभावकों भी सरकार और शिक्षा विभाग से आस लगाए बैठे हैं कि फीस तय करने के मापदंड बनाए जाएं ताकि उन्हें भी महंगाई के इस दौर में राहत मिल सके। दूसरी ओर निजी स्कूलों के बस के मासिक किराये में भी हर साल वृद्धि की जा रही है। स्कूल फीस और बस किराये का खर्च भी दोगुना हो गया है। निजी स्कूलों का संचालन सरकार और स्कूल शिक्षा बोर्ड के अधीन होता है लेकिन फीस सहित अन्य खर्चों की हर वर्ष हो रही मनमानी के आगे कोई भी कड़ा कदम नहीं उठाया गया है। इससे अभिभावक खुद को हताश महसूस कर रहे हैं और सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि निजी स्कूलों के लिए भी स्कूल फीस सहित अन्य कई तरह के फंड जो अर्जित किए जाते हैं उनमें एकरूपता लाई जाए।
बाक्स
निजी स्कूल प्रतिवर्ष 200 से 400 रुपये तक फीस में बढ़ोतरी करते हैं। साथ ही बच्चों को ले जाने वाली बस के किराये में भी वृद्धि होती है। अभिभावक स्कूलों की मनमानी को सहन कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि निजी स्कूलों पर कड़ी नजर रखे ताकि गरीब का बच्चा भी शिक्षा ग्रहण कर सके।
विज्ञापन

- अनामिका शर्मा अभिभावक।
बाक्स
निजी स्कूल हर वर्ष बच्चों की एडमिशन फीस भी बढ़ाते हैं और हर महीने फीस भी ली जाती है। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों को भी लिया जाना चाहिए और समय-समय पर उनका इस संबंध में रिकॉर्ड भी चेक होना चाहिए।
- सुषमा रानी अभिभावक।
बाक्स
निजी स्कूलों में फीस सहित अन्य फंड की बढ़ोतरी के साथ बच्चों का बस किराया भी हर वर्ष बढ़ाया जाता है। इनके लिए ऐसे नियम बनने चाहिए कि कक्षा 1 से 5 तक, 6 से 10 तक और 11 से 12 तक की क्लास के स्टैंडर्ड के अनुसार ही फीस होनी चाहिए। सरकार को हर वर्ष फीस बढ़ाने के मुद्दे पर लगाम कसनी चाहिए
विज्ञापन

- पूजा रानी अभिभावक।

बाक्स
यदि कोई गरीब या मध्य वर्ग के अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के नाम पर निजी स्कूलों में दाखिला दिलवा ही देते हैं, तो कई बार उनका आर्थिक शोषण होता है। निजी स्कूलों के प्रबंधक इस तरफ जरा भी ध्यान नहीं देते कि उनकी आर्थिक स्थिति कैसी है। कम आय वाले लोगों को फीस की तरफ से राहत जरूर देनी चाहिए।- हरप्रीत अभिभावक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें