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Una News: डेरा बाबा बड़भाग सिंह में धार्मिक उल्लास से चढ़ाया पवित्र निशान साहिब

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जो बोले सो निहाल.. के उद्घोषों से गूंज उठा मेला क्षेत्र, संगत ने उड़ाया गुलाल
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बेरी साहिब, गुरुद्वारा मंजी साहिब, कुज्जासर और चरणगंगा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
मैड़ी में श्रद्धालुओं ने धूमधाम से मनाया होली मेला

संवाद न्यूज एजेंसी

अंब (ऊना)। डेरा बाबा बड़भाग सिंह मैड़ी में होली मेला धूमधाम से मनाया गया। डेरा बाबा बड़भाग सिंह बेरी साहिब, गुरुद्वारा मंजी साहिब, कुज्जासर और चरण गंगा में धार्मिक उल्लास और रीति रिवाज के साथ पवित्र निशान साहिब चढ़ाया गया। पूरा मेला क्षेत्र बाबा के जयकारों और जो बोले सो निहाल.. के उद्घोषों से गूंज उठा। बाबा की संगत ने जमकर गुलाल उड़ाया और होली खेली।
शुक्रवार सुबह के समय संगत ने पवित्र निशान साहिब उतारकर उसे विधिवत तरीके से पवित्र जल और दूध से स्नान करवाया। इसके बाद निशान साहिब का चोला बदला गया और नया चोला पहनाया गया। मेले में आए श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा और मन्नत के मुताबिक पवित्र निशान साहिब पर रुमाले, खिलौने, गुब्बारे बांधे और बड़े-बड़े रस्सों की मदद से निशान साहिब को चढ़ाया गया। इस सारे दृश्य के दौरान मेला क्षेत्र में श्रद्धालु अपने स्थान पर खड़े होकर इसके साक्षी बने। जैसे-जैसे निशान साहिब ऊपर चढ़ता गया, बाबा के जयकारों से सारा क्षेत्र भक्ति के रंग में डूब गया। लोगों ने गुब्बारे उड़ाकर खुशी जताई और एक दूसरे को रंग लगाकर..आओ संगतों खेड़ों बाबे दियां होलियां.. भजन के साथ बाबा के चरणों में शीश नवाया।
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मान्यता के मुताबिक होली के दिन बाबा बड़भाग सिंह साक्षात रूप में मैड़ी में उपस्थित रहते हैं और लोगों की मन्नतें पूरी कर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। होली के दिन विभिन्न धार्मिक स्थलों में विशेष रूप से देसी घी से तैयार किए गए प्रसाद को बंद कमरे में ढक कर रख दिया जाता है। कहा जाता है कि इसके दो दिन बाद जब कमरों को खोला जाता है तो इस प्रसाद पर होली के दिन बाबा की मौजूदगी का निशान मिलता है। प्रसाद बाबा के हाथ (पंजाबी में प्रचलित शब्द पंजा) का निशान लगा होता है। इस प्रसाद को पंजे का प्रसाद कहा जाता है। इसके बारे में कहा जाता है कि कितना भी वक्त इस प्रसाद को रखा जाए यह खराब नहीं होता है। होली के दिन श्रद्धालु घरों को लौट जाते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दो दिन बाद मध्यरात्रि से मिलने वाले पंजे के प्रसाद के लिए मेला क्षेत्र में ही डेरा डाले रहते हैं।
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