ऊना। बारिश और तपती धूप में लोगों को सहारा देने के लिए बनाई गई वर्षाशालिका को विभाग ने बेसहारा छोड़ दिया है। ऊना-संतोषगढ़ मार्ग पर जनकौर में वर्ष 1990 के आसपास बनी वर्षाशालिका आज बदहाली की ऐसी तस्वीर बन चुकी है कि इसके भीतर बड़ी-बड़ी घास और झाडि़यां उग आईं हैं।
हालत इतनी खराब है कि इसके अंदर घुसना तक मुश्किल हो गया है। बारिश में स्कूल जाने वाले बच्चे हों या बस का इंतजार करते स्थानीय लोग, सभी के लिए सिर छिपाने की जगह होने के बावजूद यहां खड़े होने की सुविधा से वंचित रह रहे हैं ।
वर्षों से सफाई और रखरखाव के अभाव ने सरकारी सुविधा को महज एक ढांचे में बदल गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग की ओर से वर्षाशालिका की नियमित सफाई तक नहीं करवाई जा रही। घास इतनी बढ़ चुकी है कि अंदर जाने में परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि मामूली सफाई और रखरखाव से जिस सुविधा को दोबारा उपयोगी बनाया जा सकता है, उसकी ओर भी विभाग ध्यान नहीं दे रहा।
लोगों की सुविधा के लिए वर्षाशालिका हालत सुधारी जाए।