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डेढ़ साल से टेंट में विराजमान भोलेनाथ

Wed, 04 May 2016 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊना
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कुसियाला में अवैध कब्जे के नाम पर डेढ़ साल पहले तोड़े गए शिव मंदिर के बाद भोलेनाथ अब तक बेघर हैं। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद अभी तक मंदिर का निर्माण नहीं हो सका है। डेढ़ साल से यहां शिवलिंग पर नियमित तौर पर जल चढ़ाया जाता है, रोजाना शिव मंत्रों का उच्चारण होता है, लेकिन मंदिर में नहीं बल्कि एक अस्थाई टेंट के भीतर। बीते 26 नवंबर, 2014 को रायपुर मैदान के साथ लगते कुसियाला शिव मंदिर को इसलिए ढाह दिया गया कि इस मंदिर का निर्माण कथित तौर पर सरकारी जमीन पर किया गया था।
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गांव के ही एक पक्ष ने प्रशासन को इस मामले की शिकायत दी और कोर्ट के आदेशों के बाद उक्त मंदिर को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया। हैरत की बात है कि सड़क किनारे स्थित इस मंदिर का मलबा अभी तक नहीं उठाया गया। वहीं, मुख्यमंत्री के आदेशों के बावजूद मंदिर को पुर्नस्थापित नहीं किया गया। सीएम ने इस प्रकरण के दो माह बाद ही बाकायदा 10 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा करते हुए इसकी पुन: स्थापना के आदेश जारी किए थे।

इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं अपने दौरे के दौरान उपायुक्त यूनुस ने ग्रामीणों को इस मामले की छानबीन कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। गांव के उपप्रधान सतपाल सिंह, पूर्व प्रधान ज्ञान चंद, करतार सिंह, संदीप कुमार, रत्न चंद, संजीव कुमार, दर्शन, प्रदीप, यशवीर, कुलदीप, शकुंतला, सीमा, ऊषा, अनीता, रंजना का कहना है कि यहां जल्द मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए।
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भाखड़ा सड़क मार्ग पर कुसियाला में लगभग पांच वर्ष पूर्व निर्मित शिव मंदिर को प्रशासन ने 26 नवंबर 2014 को पुलिस बल की मौजूदगी में गिराया था। आरोप था कि मंदिर सरकारी भूमि पर निर्मित था और अवैध कब्जे की शिकायत पर पुलिस ने जेसीबी की मदद से कार्रवाई करते हुए गिरा दिया। हालांकि इसमें गांव के ही दो गुटों की परस्पर लड़ाई की बात भी सामने आई थी।

अदालत के आदेश पर तहसीलदार बंगाणा ने पुलिस की मौजूदगी में अवैध निर्माण पर जेसीबी के साथ कार्रवाई की। इसी बीच दर्जनों लोग पुलिस व प्रशासन से मंदिर को न तोड़ने के लिए गिड़गिड़ाते रहे। इस दौरान करीब तीन बजे शिव मंदिर को तोड़ने का फैसला हुआ व शिवलिंग, मूर्तियों को बाहर रख कर मंदिर को तोड़ दिया गया।
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