ऊना। जिला प्राथमिक शिक्षक संघ ने सरकारी प्राथमिक स्कूलों की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए अलग निदेशालय बनाने की मांग उठाई है। संघ के जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा, महासचिव सत्येंद्र मिन्हास सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों से ही बच्चों के भविष्य को दिशा मिलती है। मगर इन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो रही है।
उन्होंने वर्तमान में ऊना जिले में 150 से अधिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। कई स्कूलों में मात्र एक या दो शिक्षक कार्यरत हैं, जिससे बच्चों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में अब नई शिक्षा नीति के तहत 5+3 मॉडल लागू किया गया है, लेकिन इसके अनुरूप संसाधन और व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हैं।
स्कूलों में प्री-नर्सरी से लेकर पांचवीं तक आठ कक्षाएं संचालित हो रही हैं, परंतु शिक्षकों की कमी के चलते पढ़ाई सुचारू रूप से नहीं हो पा रही। इसके अलावा, भवन मरम्मत, मिड-डे-मील और अन्य गतिविधियों के लिए बजट समय पर नहीं मिलता, जिससे व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं। प्राथमिक स्कूलों में गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए अलग से व्यवस्थाएं करनी होंगी। इसके लिए अलग निदेशालय होना आवश्यक है। आठ कक्षाओं वाले स्कूलों के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए।
सीमित सुविधाओं में दाखिले बढ़ाना चुनौती
संघ के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में दाखिले का आंकड़ा लगातार गिर रहा है। हर दो किलोमीटर के दायरे में निजी स्कूल खुलने से अभिभावक वहां अपने बच्चों को भेजना ज्यादा उचित समझ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएं सुधारने के साथ-साथ निजी स्कूलों पर सख्ती बढ़ाई जाए, ताकि सरकारी स्कूलों में दाखिले का स्तर सुधर सके।
प्राथमिक स्कूलों में व्यवस्थाएं पहले से बेहतर हुई हैं। शिक्षकों की कमी की समस्या सरकार के ध्यान में है और नियुक्तियां भी की गई हैं। जहां तक अलग निदेशालय की मांग है। इस संबंध में कोई औपचारिक मांग नहीं आई है। यदि कोई प्रस्ताव आएगा तो उसे उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।
-सोमलाल धीमान, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग ऊना