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प्रभु की भक्ति के लिए निकालें समय : जोशी

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कलियुग में व्यक्ति प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बन रहा पाप का भागीदार
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संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। अंबोआ के डेरा पंडित हरिशाह दरबार में चल रही 27वीं श्रीमद्भागवत कथा का वीरवार को विधिवत समापन हो गया। कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। गद्दीनशीन और मौजूदा सेवादार बाबा राकेश शाह और कथावाचक कृष्ण कन्हैया जोशी की अगुवाई में उपस्थित भक्तजनों ने विधिवत पूजा-अर्चना के साथ श्रीमद्भागवत कथा को विश्राम दिया। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हरिशाह के दरबार में माथा टेका और बाद में भागवत कथा का रसपान किया। कथावाचक कन्हैया जोशी ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का बखान किया। डेरा वृंदावन के रंग में रंगा दिखा। कन्हैया जोशी ने कहा कि कोई श्रीकृष्ण के रंग में रंग कर स्वर्ग में जाना चाहता है तो कोई श्रीकृष्ण में लीन होकर जीवन का लुत्फ उठाना चाहता है। कलियुग में व्यक्ति प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पाप का भागीदार बनता जा रहा है। व्यक्ति को भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। इसके श्रवण मात्र से ही कष्ट दूर हो जाते हैं। जोशी ने कहा कि व्यक्ति को कुछ समय प्रभु भक्ति के लिए निकालना चाहिए।
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