नारी (ऊना)। कुरियाला गांव की सुमन ने बांस और सरकंडे से वस्तुएं बनाकर जिंदगी में आत्मनिर्भरता के रंग भरे हैं। यही नहीं सुमन अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की राह दिखा रही हैं। बताया कि अब धीरे-धीरे महिलाओं के अंदर जागृति आई है। यदि हमारे पास हुनर है तो इसको व्यर्थ क्यों गवाएं। महिलाएं घर पर भी मुझसे इस तकनीक को समझ कर विभिन्न उत्पाद बना रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। पांच वर्ष पहले ही मैंने यह कार्य शुरू किया है और अब खर्च निकाल कर 18000 से 20000 रुपये एक माह तक कमा लेती हूं। जो महिलाएं मेरे पास यह कला सीख कर गई हैं, वह भी धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्हें खर्च के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ते। हर महीने चार या पांच महिलाएं काम सीख रही हैं। इसके अलावा अपने बनाए हुए उत्पादों को नजदीक में ही मेलों में बेच कर अपना खर्च निकाल रही हैं। अपने बच्चों को भी अच्छे ढंग से पढ़ा रही हैं। सुमन कुमारी का कहना है कि उसने भी यह कार्य अपने पति तिलकराज से ही सीखा है। वह डेरा बाबा रुद्रानंद मार्केट में यह प्रोडक्ट बनाते भी हैं और बेचते भी हैं। इस प्रकार हम दोनों के कार्य करने से अच्छी आय हो जाती है। घर का गुजारा बढ़िया ढंग से चल रहा है। यह छोटे कार्य एक प्रकार के लघु उद्योग हैं। सरकार इनको हर ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए बिना ब्याज के लोन दे ताकि हमारी पुरानी धरोहर बची रहे। इसे दोबारा से शुरू किया जा सके। इस प्रकार से कार्यों से जुड़कर लोग स्वरोजगार चलाकर कामयाब हो सकते हैं।