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Una News: धतोल की सुदेश कुमारी प्राकृतिक खेती से बनीं आत्मनिर्भर

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तीन क्विंटल अदरक बेचकर 45 हजार रुपये की आमदनी की अर्जित
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संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा की पंचायतों में लागू की गई प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना से जुड़कर क्षेत्र के किसान रासायनिक खेती से दूरी बनाकर प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं, जिससे उनकी खेती की लागत में कमी आई है और आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
पंचायत धतोल के गांव सूरड़ा की सुदेश कुमारी प्राकृतिक खेती की सफलता की मिसाल बनकर सामने आई हैं। उन्होंने प्राकृतिक विधि से उगाई गई अदरक की तीन क्विंटल फसल बेचकर लगभग 45 हजार रुपये की आमदनी अर्जित की। वर्तमान में वह चना, प्याज और लहसुन की खेती भी पूरी तरह प्राकृतिक विधि से कर रही हैं। इस कार्य में उनकी बेटी ने भी सहयोग किया। सुदेश कुमारी को यह प्रेरणा और मार्गदर्शन पीएपी रजनी और इंदु बाला से मिला।
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कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2026 तक अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की सेहत और मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
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प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों का कहना है कि पहले रासायनिक खाद, कीटनाशक और दवाइयों पर भारी खर्च करना पड़ता था, जिससे खेती घाटे का सौदा बन जाती थी। अब जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत जैसी प्राकृतिक विधियों से खेती करके किसान बेहतर गुणवत्ता की फसल उगा रहे हैं। गांवों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जैविक उत्पाद तैयार कर बाजार तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आय में भी वृद्धि हो रही है।
बंगाणा क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अब किसानों के लिए संजीवनी बनकर उभर रही है, और आने वाले समय में इसके और भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
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