ऊना। ऊना शहर के सौंदर्यीकरण को दाग लगाने में कारोबारियों का रोल नजर आया है। व्यापार मंडल ऊना ने भी यह बात साफ कर दी है कि कारोबारियों ने अपने दुकानों के आगे रेहड़ी धारकों को जगह दे रखी है और बदले में एक-एक रेहड़ी धारक से एक दिन के 300 रुपये वसूल रहे हैं। इसके चलते ही ऊना शहर के नेशनल हाईवे के साथ रेहड़ियों की दिनोंदिन तादाद बढ़ती जा रही है और शहर से रेहड़ियां शिफ्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन भी सख्त रुख कारोबारियों पर नहीं दिखा पाया है, जिसका खामियाजा वर्तमान में ऊना शहर की जनता को अतिक्रमण की मार झेल कर चुकता करना पड़ रहा है। नेशनल हाईवे के दोनों ओर अनाधिकृत जगह पर रेहड़ियां लगाई गई हैं। जहां पर राहगीराें को चलने के लिए फुटपाथ बनाए गए हैं, वहां पर रेहड़ी धारकों का डेरा लगा हुआ है। यह सब मेहरबानी कारोबारियों की रेहड़ी धारकों पर होती दिखी है। कई जगह पर तो पहले फड़ी लगाकर कब्जा किया, बाद में रेहड़ी लगाने लगे और कुछ समय बिताने के बाद वहां पर पक्का निर्माण तक कर डाला है। जहां पर वेंडर जोन बनाया गया है। वह भी वर्तमान में सफेद हाथी बनकर रह गया है। व्यापार मंडल के भी बार-बार आग्रह करने के बावजूद प्रशासन आज तक नहीं जागा है और न ही पुलिस कोई सख्त कार्रवाई धरातल पर अमल में लाती नजर आई है। जहां जिसका मन किया बाजार और नेशनल हाईवे किनारे फुटपाथ पर रेहड़ी लगाकर अपने धंधे को अंजाम दिया जा रहा।
व्यापार मंडल के प्रधान प्रिंस राजपूत का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल प्रशासन और पुलिस से मिला था। नेशनल हाईवे किनारे और बाजारों में अनाधिकृत जगह पर रेहड़ी धारकों का कब्जा होने और दुकानों के आगे फुटपाथ पर भी रेहड़ियां लगी होने से शहर की सुंदरता को दाग लग रहा है। इस बारे में व्यापार मंडल अपने स्तर पर अनाउंसमेंट करने जा रहा है।