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आलू की चिंतामुक्त बिक्री के लिए तैयार होगी रणनीति : मुकेश अग्निहोत्री

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आलू के बंपर उत्पादक ऊना में किसानों की फसल से जुड़ी चुनौतियां बढ़ी
बीज खरीद से लेकर फसल मंडी पहुंचाने तक घाटे का रहता है डर

किसानों की सरकार से मांग, आलू की फसल पर बने ठोस रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। आलू की चिंतामुक्त बिक्री के लिए रणनीति तैयार होगी। इस संदर्भ में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने उपायुक्त ऊना को आलू की खरीद और बिक्री के लिए एक सुदृढ़ तंत्र विकसित करने के लिए विस्तृत अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अमर उजाला ने आलू की फसल अभियान के तहत इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के बाद उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने किसान हित में यह फैसला लिया है। आलू के बंपर उत्पादक ऊना जिले में किसानों की फसल पर लागत बीते पांच साल में दोगुना हो चुकी है। महंगे बीज से लेकर खाद, कीटनाशकों और लगातार सिंचाई से लागत और लाभ का अंतर कम होता जा रहा है। किसान लगातार मांग उठा रहे हैं कि गेहूं और मक्की जैसी फसलों की तरह इस फसल को लेकर भी ठोस रणनीति बनाई जाए ताकि किसानों को घाटे और धोखाधड़ी से बचाया जा सके। उधर, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी आलू की चिंतामुक्त बिक्री सुनिश्चित करने की बात कही है।


जानकारी के अनुसार आलू की फसल तैयार करने में सबसे अधिक खर्च बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और खेतों की बुवाई में होता है। करीब पांच साल पहले जहां आलू की दो माह वाली फसल का बीज 1400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहता था, तो इस वर्ष आलू का बीज 2500 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक गया। वहीं, आलू की बिजाई के समय इस्तेमाल होने वाली 12-32-16 खाद की कीमत एक बोरी में 350 रुपये के करीब बढ़ चुकी है। यही नहीं आलू की बुवाई आजकल पूरी तक मशीनों से होती है। बिजाई के लिए खेत की कई बार बुवाई होती है। इस सारी प्रक्रिया में ट्रैक्टर में डीजल की खपत होती है। बिजाई भी मजदूरों की मदद से होती है। इसके बार फसल की लगातार सिंचाई, कीटनाशकों व खाद की खरीद, मजदूरी सहित छोटे मोटे अन्य खर्च किसानों को करने पड़ते हैं। मंडी तक पहुंचाने के लिए किसानों को गाड़ियां खुद किराये पर उपलब्ध करवानी पड़ती हैं।
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किसान अमनदीप ने बताया कि आलू की फसल में तो अब मौसम भी साथ नहीं देता। अगर फसल पर एक-दो बार बारिश हो जाए तो पैदावार शानदार होती है। इस साल तो फसल की लागत से पटाई तक कोई बारिश नहीं हुई। इसके विपरीत दिन के समय तेज धूप ने फसल को प्रभावित कर दिया। उन्होंने कहा कि समय के साथ आलू उत्पादक किसानों की संख्या बढ़ तो रही है लेकिन इस फसल से लाभ कमाना अब आसान नहीं रह गया। सरकार को किसानों की सुविधा के बारे में व्यवस्था करनी चाहिए।

किसान रोहित कुमार ने बताया कि छोटे किसानों के लिए आलू की फसल ज्यादातर घाटा देकर जाती है। हर साल आस रहती है कि इस बार लाभ कमाएंगे लेकिन कभी दाम कम मिलते तो कभी पैदावार कम होती है। आलू के न्यूनतम दाम तय होने से किसानों में घाटे का डर खत्म होगा। सरकार इस पर जल्द कोई फैसला ले ताकि बिना किसी डर के यह फसल उगाई जा सके।
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प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि ऊना के मैदानी इलाकों में आलू की बंपर पैदावार होती है। पूरे जिले के आलू उत्पादकों की फसलों की सुरक्षित और चिंता मुक्त बिक्री सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त व्यवस्था बनाई जाएगी। इस कदम से किसानों के हितों की रक्षा होगी और उन्हें किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा। उपायुक्त ऊना को आलू की खरीद और बिक्री के लिए एक सुदृढ़ तंत्र विकसित करने के लिए विस्तृत अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
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