भीषण गर्मी में प्रवासी परिवारों ने शुरू किया झुग्गियां दोबारा बनाने का काम
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। लालसिगीं क्षेत्र में शनिवार को हुए भीषण अग्निकांड में झुग्गियां जलकर राख होने के बाद जहां एक ओर प्रवासी परिवारों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया, वहीं दूसरी ओर उनके अदम्य साहस और संघर्ष की मिसाल भी देखने को मिली। आग की भयावह घटना के महज एक दिन बाद ही प्रभावित परिवार अपने आशियाने को फिर से खड़ा करने में जुट गए।
रविवार को तेज धूप और उमस भरी गर्मी के बीच पुरुष, महिलाएं और बच्चे मिलकर झुग्गियों के पुनर्निर्माण का कार्य करते नजर आए। आग में उनके घरों के साथ-साथ कपड़े, राशन और दैनिक उपयोग का अधिकांश सामान जलकर नष्ट हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी और नई शुरुआत का संकल्प लेकर फिर से अपने घर बसाने में जुट गए।
खुले आसमान के नीचे रात बिताने के बाद प्रभावित परिवार बांस, तिरपाल और अन्य उपलब्ध सामग्री की मदद से अस्थायी आशियाने तैयार कर रहे हैं। परिवारों का कहना है कि सिर पर छत होना सबसे बड़ी जरूरत है और इसी उद्देश्य से सभी लोग मिलकर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
सब कुछ खो देने के बावजूद इन परिवारों के चेहरे पर निराशा से अधिक संघर्ष का भाव दिखाई दे रहा है। महिलाएं घर की व्यवस्था संभालने के साथ निर्माण कार्य में हाथ बंटा रही हैं, जबकि बच्चे भी अपने माता-पिता की मदद करते नजर आए। यह दृश्य हर किसी को भावुक करने के साथ-साथ प्रेरित भी कर रहा है।
लालसिंगी के इन प्रवासी परिवारों ने यह साबित कर दिया है कि विपरीत परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादों और मेहनत के दम पर जीवन को फिर से पटरी पर लाया जा सकता है। उनका साहस, संघर्ष और आत्मविश्वास समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।