गुरुद्वारों में शबद कीर्तन कर गुरु की महिमा का गुणगान
श्रद्धालुओं ने किया पवित्र नदियों में स्नान
संवाद न्यूज एजेंसी
संतोषगढ़ (ऊना)। खालसा पंथ का सृजन दिवस और बैसाखी पर्व रविवार को जिलाभर में धूमधाम से मनाया गया। धार्मिक स्थानों पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। वहीं, सिख समाज की ओर से बैसाखी पर्व पर गुरुद्वारों में विशेष धार्मिक दीवान सजाकर संगत को गुरु के बताए आदर्शों से अवगत कराकर उन पर चलने का संदेश दिया गया। बैसाखी पर्व पर नगर के गुरुद्वारा शहीदां सिंघा दा में विशेष धार्मिक दीवान सजाया गया। इसमें दूरदराज क्षेत्रों से आए रागी जत्थों ने गुरु की महिमा का गुणगान किया। गुरुद्वारे में अटूट लंगर भी बरता गया। जानकारी के अनुसार सुबह सात बजे कीरतपुर साहिब से पहुंचे रागी भाई दिलबाग सिंह, हरजीत सिंह की अगुवाई में पिछले तीन दिन से चल रहे गुरुग्रंथ साहिब के अखंड पाठ का भोग डाला गया। गुरुद्वारा में सजाए गए विशेष धार्मिक दीवान में शबद-कीर्तन और कथा के माध्यम से गुरु की महिमा का वर्णन कर बताया गया कि गुरु गोबिंद सिंह ने 1699 ई.में बैसाखी वाले दिन ही अमृत की पवित्र दात प्रदान करके खालसा पंथ की स्थापना की थी। बताया गया कि भारत के लोगों की आत्मा जुल्म और अन्याय के डर से बहुत कमजोर हो गई थी। ऐसेे मुश्किल समय में गुरु जी ने आम लोगों को संगठित किया और अमृत संचार के माध्यम से जनता के जीवन में नई लहर पैदा की। इस अवसर पर गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान सतबीर सिंह, मास्टर मलकीयत सिंह, गुरमेल सिंह, अमरजीत सिंह, संतोष सिंह, ज्ञान सिंह, सतनाम सिंह, चरणजीत सिंह, मुख्तियार सिंह, इंद्रजीत सिंह, ग्रंथी भजन सिंह और इलाके की अन्य संगत भी मौजूद रही।
बैसाखी पर्व के चलते क्षेत्र के ब्रह्महोती स्थित ब्रह्मा जी मंदिर, मां गंगा मंदिर, बाबा ऊधो, गुरुद्वारा विभोर साहिब में भी श्रद्धालुओं ने सतलुज नदी में पवित्र स्नान किया। नगर परिषद संतोषगढ़ एवं निकटवर्ती सनोली, अजोली, रायपुर, देहलां, गिड़गिड़ा साहिब, सुबोआना हरोली सहित अन्य क्षेत्रों के गुरुद्वारों में बैसाखी पर्व धूमधाम से मनाया गया।