अमर उजाला पड़ताल
जयराम सरकार में हुआ उद्घाटन, सुक्खू कार्यकाल में भी नए भवन में शिफ्ट नहीं हुए वार्ड
करोड़ों के मातृ-शिशु अस्पताल में ओपीडी के अलावा कोई सुविधा नहीं
लोगों ने कहा, मातृ-शिशु अस्पताल में जल्द शिफ्ट हो गायनी वार्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान क्षेत्रीय अस्पताल ऊना की इमारत दशकों पुरानी हो चली है। समय के साथ यहां मरीजों का बोझ बढ़ा है। वर्तमान में क्षेत्रीय अस्पताल के पुराने भवन में व्यवस्थाएं पुख्ता करना मुश्किल है। मंगलवार को अस्पताल के गायनी वार्ड में शॉर्ट सर्किट से आग भड़क गई। गनीमत रही कि आसपास कर्मचारी व होमगार्ड मौजूद थे।
जानकारी के मुताबिक क्षेत्रीय अस्पताल पर बढ़ रहा बोझ कम करने के लिए 2021 से मातृ-शिशु अस्पताल की अलग इमारत तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। वर्तमान में पूरा भवन बनकर तैयार है लेकिन बीते करीब एक साल से निर्माण कार्य से जुड़े छोटे मोटे कार्य ही पूरे नहीं हो पाए। इससे मातृ-शिशु अस्पताल में अभी तक केवल स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओपीडी ही शिफ्ट हो पाई। जबकि, यहां बाल एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ का वार्ड बनाने के लिए करोड़ों का सामान धूल फांक रहा है। उधर, क्षेत्रीय अस्पताल ऊना करीब साढ़े चार दशक पहले निर्मित हुआ। समय के साथ यहां मरीजों के लिए विभिन्न सुविधाएं शुरू हुईं, लेकिन इस समय अस्पताल का पुराना भवन मरीजों की आमद के मुकाबले कम पड़ रहा है। इसे ध्यान में रखकर करीब 30 करोड़ से चार वर्ष पहले मातृ-शिशु अस्पताल के अलग भवन का निर्माण किया। बीती जयराम सरकार के कार्यकाल में ही मातृ-शिशु अस्पताल का भवन का उद्घाटन तक कर दिया लेकिन मौजूदा सरकार का आधा कार्यकाल बीत चुका और मातृ-शिशु अस्पताल में अभी भी वार्ड शिफ्ट नहीं हुए।
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क्षेत्रीय अस्पताल में विद्युत तारों की भरमार
गर्मी और सर्दी के मौसम में मरीजों, अस्पताल स्टाफ, डॉक्टर और अधिकारियों की सुविधाओं के लिए एसी, हीटर, पंखे, लाइट सहित कई व्यवस्थाएं बिजली पर आधारित हैं। समय के साथ अस्पताल में बिजली का लोड बढ़ता जा रहा है। जबकि, इसके लिए बिछाए विद्युत तार कई साल पुरने हैं। ऐसे में शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाएं होने का खौफ हर समय रहता है। स्थानीय लोगों सुमित शर्मा, रविंद्र सेठी, सतविंदर सिंह, रोहित जसवाल ने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल पर बोझ कम कर नए भवन में शिफ्ट होना चाहिए। सबसे संवेदनशील वार्ड महिलाओं और शिशुओं का है। वहां हीटर और एसी का इस्तेमाल सबसे अधिक होता है। अगर इससे जुड़े वार्ड नए भवन में शिफ्ट हो जाएं तो हादसों का डर कम होगा और पुराने भवन पर बोझ भी घटेगा।
कोट्स
मातृ-शिशु अस्पताल का कार्य अंतिम चरण में हैं। लोक निर्माण विभाग निर्माण कार्य में जुटा है। एक माह में कार्य मुकम्मल होने की उम्मीद है। मातृ-शिशु अस्पताल शुरू होने से निश्चित तौर पर क्षेत्रीय अस्पताल के पुराने भवन से बोझ घटेगा। फरवरी माह में ही इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कश्मीर सिंह ठाकुर, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग