बीमार, बुजुर्गों और छोटे-छोटे बच्चों को सांस लेने में हो रही दिक्कत
जंगली जानवरों के अधजले शव मिले, पशु-पक्षी आग से तड़प-तड़प कर मर रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा(ऊना)। गर्मियां शुरू होते ही कुछ शरारती तत्व जंगलों को आग के हवाले कर रहे हैं। क्षेत्र में पिछले एक माह में विभिन्न स्थानों पर जंगलों में आग लगने घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्तमान में भी जंगलों में आग लगी हुई है। इस आग से जहां एक तरफ गर्मी बढ़ रही है। वहीं, दूसरी तरफ लोगों को सांस लेने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान सांस संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस घटना में जहां अभी तक वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं, क्षेत्र में दिन-रात जल रहे जंगलों की लपटों के धुंए से बुजुर्ग बीमार और छोटे बच्चों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा जंगलों में आग के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इससे लोगों की परेशानी आए दिन बढ़ती जा रही है। इन मामलों पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से खास तौर पर सांस के रोगियों को खास तौर पर बचाव रखने की सलाह दी जा रही है। वहीं, जंगलों में लग रही आग पर स्थानीय लोगों में प्रवीण कुमार, नरेश चंद, मनसी देवी, प्रेम चंद व अन्य ने सवाल उठाए हैं कि फायर सीजन शुरू होने से पूर्व जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। क्षेत्र में बीते एक माह से जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इन मामलों में अभी तक किसी व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। बता दें कि जंगलों में आग लगने के करण वन्य प्राणी भी बड़े स्तर पर आग लगने से मौत का ग्रास बने हैं।
कोट्स
धुएं से लोगों को बचना चाहिए। खास तौर पर जो लोग पहले से ही सांस संबंधी व अन्य रोगों से ग्रस्त हैं, उन्हें विशेष ध्यान देना चाहिए। धूप में बाहर न निकलें और पेयजल पदार्थ अधिक से सेवन करें। साथ ही आंखों को ठंडे पानी से धोएं।
डाॅ. नरेश शर्मा, स्वास्थ्य खंड अधिकारी, थानाकलां
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