बंगाणा (ऊना)। प्रदेश सरकार के कोरोना कर्फ्यू से अधिकतर दुकानदार असमंजस में हैं। दुकानदारों का आरोप है कि सरकार की नई गाइडलाइन में बाजार की कुछ दुकानों को खोलने की पूर्णतया छूट दे दी गई है। जबकि कुछ दुकानों को पूर्णतया बंद रखने के निर्देश दिए हैं।
किराना, मिठाई, दूध, सब्जी, हार्डवेयर, सीमेंट, सरिया, बीज, दवाइयां, होटल, ढाबे, कृषि संबंधी समान, कन्फेक्शनरी जैसी अधिकतर दुकानों को खुला रखने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कपड़ा, किताबें, मनियारी, जूते, बर्तन आदि दुकानों को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। कारोबारी लव कुश, नवीन कुमार, विपन शर्मा, मस्तराम, सुरेश कुमार, सुदेश शर्मा, अश्विनी, सर्वजीत सिंह, प्यारे लाल, मनोज तिवारी, नीतू, अंजू, अमन विशिष्ट ने सरकार के फैसले का विरोध किया। उन्हाेंने कहा कि हमारे भी परिवार हैं और हमने भी दुकानों का किराए देना है। प्रशासन और सरकार को सभी दुकानों को 2 से 3 घंटे तक खुलने का समय देना चाहिए। सरकार ने लगातार बढ़ रही महामारी और महंगाई के दौर में आधी दुकानों को बंद करने के निर्देश देकर दुकानदारों की कमर तोड़ दी है।
उन्होंने कहा कि बीते 14 माह से दुकानदार आर्थिक मंदी झेल रहे हैं। केंद्र या राज्य सरकार ने दुकानदारों को एक नए पैसे की सहायता नहीं की है। जबकि दुकानदारों के ब्याज को माफ करने की बात कही गई थी। किसी भी दुकानदार का एक भी रुपये का ब्याज केंद्र और राज्य सरकार कम नहीं कर पाई है। दुकानदारों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से क्षेत्र के सभी दुकानदार आहत हैं। प्रदेश सरकार दुकानदारों और गरीब समुदाय की सहायता के बजाय निरंकुश फैसले लोगों पर थोप रही है। दुकानदारों ने जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि सभी दुकानदारों को एक दिन में 2 से 3 घंटे पहले की भांति दुकानें खोलने का समय तय किया जाए। दुकानदारों का कहना है कि अगर दुकानें बंद ही रखनी है तो उनके खाते में कम से कम 10 हजार रुपये जमा करवाए जाएं ताकि वह परिवारों का पोषण और दुकानों के किराए अदा कर सकें।
इस बारे में इंटक व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार निरंकुश फैसले व्यापारियों पर थोप रही है। दुकानदारों को 2 से 3 घंटे का समय दुकानों को खोलने के लिए दिए जाना जरूरी है। व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष सुमेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह फैसला सही नहीं है। सभी दुकानदारों को कुछ समय दुकानें खोलने के लिए दिया जाना चाहिए। इस संबंध में प्रदेश सरकार से बात की जाएगी।