अभी भी तिथि तय नहीं, नगरवासी कर रहे इंतजार, पाइपलाइन बिछीं और ट्रीटमेंट टैंक निर्माण पर अटकी बात
फिलहाल कछुआ गति से बढ़ रही प्रक्रिया, करीब 22 करोड़ रुपये होंगे खर्च
सुरेश बसन
ऊना। नगर परिषद संतोषगढ़ में सीवरेज लाइन को बिछते बिछाते करीब तीन दशक होने वाले हैं। अभी तक इसके लोकार्पित होने की तिथि तय नहीं हो पाई है। सरकारों की अनदेखी स्वरूप वर्ष 1996 में योजना के लिए निर्धारित 2.5 करोड़ का एस्टीमेट खर्च अब 22 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। हालांकि अभी तक जल शक्ति विभाग ने इसके स्पेशल ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण पूरा कर लिया है।
करीब 2.5 एमएलडी क्षमता के एसटीपी से नगर की सारी आबादी को हाउस होल्ड के हिसाब से कनेक्शन वितरित करने की क्षमता रखता है। अधिकारियों की मानें तो प्लांट के साथ 1700 कनेक्शन जुड़ सकेंगे। कुल 22 करोड़ के अनुमानित बजट में से जल शक्ति विभाग ने योजना पर करीब सात करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। इसमें से पांच करोड़ रुपये से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर खर्च हुए हैं। इसके अलावा आठ करोड़ रुपये से शहर में पाइपलाइन डालने के काम को शुरू किया गया है।
विड़ंबना है कि लगभग तीन दशक से यह कार्य समय-समय पर रही सरकारों के कार्यकाल में गति नहीं पकड़ पाया। साफ जाहिर है कि किसी भी सरकार के समय में इस प्रोजेक्ट को लेकर संवेदनशीलता से कार्य नहीं किया गया, जिसका खामियाजा स्थानीय बाशिंदों को भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में भी इसके पाइपलाइन बिछाने का काम कछुआ गति से ही चल रहा है। नगरवासी योजना का इंतजार कर रहे हैं।
पाइपलाइन के न मिलने की दिक्कत
संतोषगढ़ में सीवरेज पाइपलाइन बिछाने में बड़ी दुविधाएं रही हैं। बीते डेढ़-दो वर्ष से इसकी गुणवत्ता अनुसार पाइपलाइन के लिए टेंडर अटके रहे। अब इसकी वितरण प्रणाली में प्रयोग होने वाले पाइपलाइन आई हैं। बकायदा वार्ड आठ से इसके कार्य को शुरू भी किया गया है। हालांकि वार्डों और सड़कों में पहले से ही पाइपलाइन बिछी हुई है। दूसरा वर्तमान आबादी के लिहाज से इसका दोबारा डिजाइन भी तैयार कराया गया है। अब यहां पर जरूरत होगी, वहीं पर पाइपलाइन डालने का काम किया जाएगा। फिलहाल पाइपलाइन मिलने के अनुसार ही काम होगा।
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फिलहाल पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया गया है। उत्तम गुणवत्ता के पाइपलाइन लेने के लिए कुछ बाधाएं रही हैं। विभागीय तौर पर काम अपनी गति से किया जा रहा है। फिलहाल तक करीब सात करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस योजना पर 22 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
-ई. नरेश कुमार धीमान, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग, ऊना