जिला अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने अनुबंध आधार पर विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए समान काम, समान वेतन के आधार पर नियमित किए जाने की मांग उठाई है। महासंघ का कहना है कि सरकार की ओर से इन कर्मचारियों के साथ वेतन विसंगति पैदा की गई है, जिसे दूर करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। महासंघ ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सातवें पे-कमीशन को लागू करने, बजट में कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए मेडिपर्सन एक्ट लागू करने तथा बजट में कर्मचारियों को दिए जाने वाले विभिन्न लाभों को भी शामिल करने की भी मांग उठाई है।
जिला अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने कहा कि समान काम समान वेतन की नीति को प्रदेश में लागू करके कर्मचारियों को राहत प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में सरकारी विभागों में हजारों कर्मचारी अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। यह कर्मचारी भी नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन समान कार्य के बदले इन कर्मचारियों को समान वेतन सरकार की ओर से प्रदान नहीं किया जा रहा है।
इसके चलते इन कर्मचारियों के वेतन में विसंगति उत्पन्न हो चुकी है। यदि सरकार की ओर से इस वेतन विसंगति को दूर कर दिया जाता है तो इसका लाभ प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के तमाम सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को पांच वर्ष के अनुबंध के बाद ही नियमित करने का प्रावधान है। इस अवधि के दौरान अनुबंध कर्मचारियों को नाममात्र का वेतन मिलता है। इस वेतन में इन कर्मचारियों को अपने परिवार का पालन पोषण करना भी मुश्किल होता है। जबकि, स्वास्थ्य विभाग और अन्य विभागों की कल्याण समितियों द्वारा रखे गए कर्मचारियों को भी नियुक्ति तिथि से ही नियमित किया जाना चाहिए।