ऊना। प्रदेश में करीब 2400 एसएमसी शिक्षकों को नियमित करने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति ने आवाज उठाई है। संगठन के अध्यक्ष इंजीनियर बलवीर चौधरी तथा हरोली मंडल के अध्यक्ष जसपाल चौधरी ने कहा कि 2400 एसएमसी शिक्षकों को नियमित करना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना है। एसएमसी शिक्षकों को एलडीआर कोटा प्रदान करना प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। उन्होंने कहा कि अस्थाई शिक्षकों को नियमित करने से शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ेगा।
प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री को विधानसभा में उनके अनुपूरक प्रश्न का उतर देते हुए कहा था कि उद्देश्य पूर्ति के लिए एसएमसी शिक्षकों को रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसा नहीं बोला गया कि उन्हें नियमित किया जाए। इसलिए सरकार इनको नियमित नहीं कर रही। दुर्भाग्यवश वर्तमान प्रदेश सरकार ने भर्ती नियमों में संशोधन करके एसएमसी शिक्षकों को नियमित करने का निर्णय ले लिया, जो प्रतिभाशाली युवाओं के लिए चिंता का विषय है। विपक्ष भी चोर दरवाजे से हो रही एसएमसी शिक्षकों की भर्ती का मौन समर्थन कर रहा है।
24 नवंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि एसएमसी शिक्षकों की भर्ती एसएमसी पॉलिसी के अनुसार सही है लेकिन यह भर्तियां तब तक सही हैं, जब तक इनके स्थान पर नियमानुसार नियमित शिक्षक नहीं आ जाते। भर्ती नियमों के अनुसार नियमित शिक्षकों की भर्ती या तो लिखित परीक्षा से हो सकती है या रोजगार कार्यालय के माध्यम से हो सकती है। एसएमसी शिक्षकों की भर्ती में उक्त कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। हिमाचल सरकार ने सरकारी स्कूलों व कॉलेजों में शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए लोकसेवा चयन आयोग तथा कर्मचारी चयन आयोग का गठन कर रखा है। यही नहीं भर्ती नियमों के अनुसार टीजीटी शिक्षकों की 50 फीसदी भर्तियां रोजगार कार्यालय के माध्यम से होनी चाहिए। प्रदेश के सभी पात्र उम्मीदवारों को रोजगार के समान अवसर मिलने चाहिए।