कंचन मेहता अपने बूटीक में सिलाई का काम करते हुए। स्त्रोत : संवाद
बड़ूही (ऊना)। जब हौसले बुलंद हों तो सफलता किसी भी परिस्थिति में हासिल की जा सकती है। इसका जीवंत उदाहरण हैं कंचन मेहता, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन के बल पर न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान किया। कभी घर के एक कोने में सिलाई मशीन लगाकर छोटे स्तर से काम शुरू करने वाली कंचन आज एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जाती हैं।
अपने बुटीक और डिस्पोजेबल सामान के कारोबार से वह हर महीने 20 से 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। कंचन बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही कपड़े सिलने और डिजाइनिंग का शौक था। शादी से पहले उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया और इस हुनर को अपने कॅरिअर की दिशा बनाने का निश्चय किया। शादी के बाद भी उन्होंने अपने इस शौक को नहीं छोड़ा।
कंचन कहती हैं शुरुआत में परिवार का सहयोग और विश्वास सबसे बड़ा सहारा था। धीरे-धीरे काम बढ़ा और लोगों ने मेरे बनाए कपड़ों को पसंद करना शुरू किया। उसी ने मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। कंचन ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत अंब में एक वर्ष का कोर्स किया। इसके बाद उन्होंने तीन माह की अतिरिक्त ट्रेनिंग पूरी की, जिससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ गया।
फिर उन्होंने दिल्ली में एक वर्ष तक प्रोफेशनल बुटीक डिजाइनिंग का अनुभव लिया। वहां से लौटने के बाद ऊना में कुछ समय तक घर से ही कपड़े सिलने का काम किया और फिर किराये पर एक दुकान लेकर कंचन बुटीक की शुरुआत की। आज कंचन न केवल आत्मनिर्भर हैं बल्कि अपने आसपास की महिलाओं को भी आगे बढ़ने की राह दिखा रही हैं।
शुरुआत में कई चुनौतियां आईं
कभी ग्राहक कम आते, कभी मुनाफा न के बराबर होता लेकिन कंचन ने हार नहीं मानी। उन्होंने ग्राहकों की पसंद को समझा, डिजाइनिंग में नए ट्रेंड अपनाए और धीरे-धीरे काम चल निकला। अब उनके साथ दो अन्य महिलाएं भी बुटीक में कार्यरत हैं। वह बताती हैं आज जब मैं किसी को काम देते हुए देखती हूं तो लगता है कि मेहनत बेकार नहीं गई।