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2003 नियमों से हो रहा युक्तिकरण तर्कसंगत नहीं : चंद्र केश

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बोले, वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य के अनुरूप नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। हिमाचल प्रदेश साइंस मास्टर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष चंद्र केश धीमान ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा विभाग की ओर से 2003 में बनाए गए युक्तिकरण नियमों के आधार पर वर्तमान में शिक्षकों का युक्तिकरण किया जा रहा है। यह आज की परिस्थितियों और विद्यालयों में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या के अनुरूप नहीं है। प्रेस बयान में कहा कि 2003 के युक्तिकरण नियम उस समय के अनुसार बनाए गए थे, जब प्रदेश और जिला में विद्यालयों की संख्या कम हुआ करती और विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक हुआ करती थी। उस वक्त शिक्षक और छात्र अनुपात की 1: 60 में बांटा गया था। उस समय के डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता और विद्यालयों का बुनियादी ढांचा आज की तुलना में बिल्कुल अलग था। पिछले दो दशक में शिक्षा क्षेत्र में बड़े परिवर्तन हुए हैं। शिक्षा का अधिकार 2009 और नई शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशें आईं। उनमें 1: 35 के अनुपात की बात की गई।
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वर्तमान में कई विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है। बावजूद इसके दो दशक के बाद भी पुराने नियमों के आधार पर जब युक्तिकरण किया जाता है तो यह न केवल शिक्षकों के हितों के खिलाफ है, बल्कि छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि युक्तिकरण किया जाए, परंतु इसके लिए 2003 में बने नियमों को आधार न बनाया जाए।उन्होंने आग्रह किया कि युक्तिकरण की प्रक्रिया से पहले मुख्याध्यापकों और प्रवक्ता न्यू की पदोन्नति सूची जारी की जानी चाहिए थी।
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