ऊना। जिले में निजी स्कूलों की ओर से परीक्षाओं के दौरान भी पूरे महीने का वाहन किराया वसूलने के मामले सामने आने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा अवधि में बच्चे मुश्किल से 15 से 20 दिन ही स्कूल बस में सफर करते हैं, इसके बावजूद उनसे पूरे महीने का किराया लिया जा रहा है। इस मनमानी से अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है।
अभिभावकों के अनुसार वार्षिक परीक्षाओं के दौरान कई स्कूलों में कक्षाएं सीमित समय के लिए लगती हैं या कुछ दिनों की छुट्टियां भी रहती हैं। ऐसे में स्कूल बसों का उपयोग सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम होता है लेकिन निजी स्कूल प्रबंधन वाहन किराये में किसी प्रकार की राहत नहीं दे रहे।
अभिभावकों में अशोक कुमार, कृष्णपाल, राजकुमार, तिलकराज, हरप्रीत सिंह का कहना है कि पहले से ही निजी स्कूलों की फीस, किताबों और अन्य खर्चों का बोझ काफी अधिक है। ऐसे में परीक्षा अवधि में भी पूरे महीने का बस किराया वसूलना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में बस सुविधा का उपयोग कम होने के बावजूद प्रबंधन किसी भी प्रकार की छूट देने को तैयार नहीं है। अभिभावकों ने बताया कि जब इस संबंध में स्कूल प्रबंधन से बात की जाती है तो उन्हें वाहनों पर होने वाले खर्च, चालकों का वेतन सहित अन्य नियमों का हवाला देकर पूरा किराया जमा करवाने के लिए कहा जाता है। अभिभावकों का कहना है कि यदि बच्चा पूरे महीने बस सेवा का उपयोग नहीं कर रहा है तो उसी अनुसार किराया लिया जाना चाहिए।
अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि विभाग को निजी स्कूलों की बस फीस को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिल सके।
उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल कुमार ने कहा कि स्कूल परिवहन व्यवस्था को लेकर पारदर्शी नीति बनाना आवश्यक है ताकि अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच इस तरह के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। विभाग इस समस्या पर संज्ञान लेकर उचित समाधान करेगा।