ऊना। जिला में आलू की फसल अंतिम चरण में चल रही है। एक सप्ताह तक कई स्थानों पर इस फसल को जमीन से निकालने (पटाई) का काम शुरू हो जाएगा।
अमूमन नवंबर माह की शुरुआत में आलू निकालने का काम शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार बिजाई में देरी होने से पटाई भी देरी से होगी। जानकारी के अनुसार जिला में करीब 2000 हेक्टेयर जमीन में आलू की दो माह वाली फसल लगाई गई है। अधिकतर फसल स्वां नदी के आसपास के इलाकों में लगाई गई है। इसका कारण है कि नदी के आसपास का फसल रेतीली है। रेतीली जमीन में आलू का उत्पादन शानदार होता है। ऊना में तैयार होने वाले आलू की खास बात यह भी है कि यहीं से आलू की नई फसल सबसे पहले मंडियों में पहुंचती है।
खासकर पड़ोसी राज्य पंजाब में इस फसल का खासा इंतजार रहता है। बाजार में आए नए आलू की खरीदारी तेजी से होती है। खाने में स्वादिष्ट होने के कारण इसे लोग हाथों हाथ खरीदते हैं। वहीं ऊना के किसानों की आर्थिकी सुधारने में इस फसल का काफी योगदान है। कई किसान तो आलू की फसल को अपनी जीविका का साधन मानते हैं। आलू की अच्छी पैदावार के लिए किसान इस समय फसल की सिंचाई और खाद के छिड़काव में जुटे हुए हैं। उन्हें फसल के दाम भी अच्छे रहने की उम्मीद है।
कोट्स
जिला में आलू की फसल शानदार तरीके से तैयार हुई है। अच्छी पैदावार की पूरी उम्मीद है। यहां के किसान इस फसल को तैयार करने की महारत रखते हैं। हालांकि इस बार सिंचाई पर अधिक मेहनत हुई। उम्मीद है कि फसल को अच्छे दाम मिलने से किसानों का आर्थिकी बेहतर होगी।
डॉ कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग