मैहतपुर (ऊना)। ‘नाती-दोहती रह गई, नक्क ते मक्खी बह गई’ कुछ ऐसा ही मुहावरा स्थानीय नपं में उस वक्त कांग्रेस पार्टी की ओर से उछाला गया, जब एक आजाद महिला पार्षद ने अध्यक्ष पद हथिया कर पार्टी को जोर का झटका दे डाला।
मैहतपुर-बसदेहड़ा नगर पंचायत पर लगातार पांचवीं बार भाजपा के भगवा फहराने में कामयाबी हासिल करके कांग्रेस को चारों खाने चित्त कर दिया है। कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेताओं के पास सिवाय छटपटाहट के कुछ हाथ नहीं लगा है। इस बार कांग्रेस नपं पर कब्जा जमाने को लेकर बेहद उत्साहित थी। वजह साफ थी कि इस दफा कांग्रेस समर्थक तीन पार्षद विजयी हुए थे तो भाजपा के पास भी अध्यक्ष पद कब्जाने को लेकर एक आंकड़े की कमी थी। कांग्रेस के स्थानीय नेता पूरी तरह से आशावान थे। सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों शिमला में मुख्यमंत्री से अपने समर्थक पार्षदों की भेंट कराकर उन्हें इस बार मैहतपुर-बसदेहड़ा पर पिछले बीस साल से फहराए जा रहे भगवा को उखाड़ने की पूरी रणनीति तैयार कर ली, लेकिन वीरवार को जो उलटफेर हुआ, उसकी शायद कांग्रेसी खेमे ने कल्पना तक नहीं की होगी।
नगर पंचायत को भाजपा से मुक्त करवाने की कांग्रेस की पूरी योजना धरी की धरी रह गई। सूत्र बताते हैं कि नपं पर कब्जा जमाने को लेकर बनाई जा रही रणनीति में भाजपा ने कांग्रेस विचारधारा की आजाद विजयी पार्षद को सियासी दलदल से ऊपर उठकर क्षेत्र के विकास को मुख्य मुद्दा मानते हुए समर्थन का वादा किया, भाजपा का यह तर्क आजाद पार्षद मंजू चंदेल के दिल को छू गया और मंजू चंदेल ने किसी पार्टी विशेष से बंधे रहने की बजाय इलाके के हित में भाजपा की रणनीतिकारों का सुझाव माना और उन्हीं के आग्रह पर अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालना कबूल किया। हालांकि निकाय चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े गए, लेकिन स्थानीय स्तर पर अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए पार्टी समर्थक इन चुनावों में भी राजनीति करने से गुरेज नहीं करते।
इसी के चलते वीरवार को कांग्रेस पार्टी के नेताओं/कार्यकर्ताओं ने नवनियुक्त अध्यक्षा के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करते हुए नारेबाजी भी की। इस मौके पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती, जिला अध्यक्ष बलवीर बग्गा, रमेश भडोलियां, सुरेंद्र मोहन, कांग्रेस की ओर से सतपाल रायजादा, तेलूराम अटवाल, सोमनाथ ठाकुर, बोधराज, विवेक भारद्वाज व राजीव भारद्वाज समेत कई अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।