ऊना। उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पीर निगाह मंदिर के संचालन अधिकार को लेकर ग्राम पंचायत बसोली और स्थानीय लोगों का सब्र अब जवाब देने लगा है। पंचायत चुनाव संपन्न होने, नई पंचायत के कार्यभार संभालने और चुनाव आचार संहिता समाप्त हुए एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मंदिर का प्रबंधन पंचायत को वापस नहीं सौंपा गया है। इसी मांग को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधि उपायुक्त कार्यालय पहुंचे तथा प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रखा। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने और चुनाव में देरी के कारण प्रशासन ने अस्थायी तौर पर मंदिर के लिए प्रशासक नियुक्त किया था लेकिन अब परिस्थितियां सामान्य हो चुकी हैं।
ऐसे में मंदिर का संचालन अधिकार तत्काल ग्राम पंचायत को सौंपा जाना चाहिए ताकि मंदिर से जुड़े संसाधनों का उपयोग पहले की तरह जनहित और विकास कार्यों में किया जा सके। ग्राम पंचायत बसोली के प्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों ने उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर पीर निगाह मंदिर के संचालन अधिकार को लेकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पंचायत चुनाव पूर्ण होने के बाद भी मंदिर का प्रबंधन प्रशासक के पास बनाए रखना उचित नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि पीर निगाह मंदिर का संचालन वर्षों से ग्राम पंचायत बसोली द्वारा किया जाता रहा है। पंचायत के कार्यकाल की समाप्ति और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में हुई देरी के चलते प्रशासन ने मंदिर के संचालन के लिए प्रशासक नियुक्त किया था। अब नई पंचायत विधिवत कार्यभार संभाल चुकी है तथा चुनाव आचार संहिता भी समाप्त हो चुकी है, इसलिए मंदिर का संचालन अधिकार पंचायत को वापस सौंपा जाना चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इससे पहले भी दो बार प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखी जा चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने प्रशासन से जल्द सकारात्मक फैसला लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
उपायुक्त कार्यालय में अतिरिक्त आयुक्त विनय मोदी ने ग्रामीणों का पक्ष सुनने के बाद कहा कि पूरे मामले से उपायुक्त को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन इस विषय पर सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जल्द उचित निर्णय लेगा।