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ताउम्र के लिए जख्म दे गया इकलौता चिराग

Fri, 18 Nov 2016 10:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अंब
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इसे कुदरत की नाइंसाफी कहें या शिक्षा विभाग की लापरवाही। जिसने, मन्नतों से मांगे बच्चे को अपनी आंखों के आगे मरते देखना किसी माता-पिता की नियती बना दिया। पलोह की प्राथमिक पाठशाला इसकी गवाह बन गई।
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इसके गेट का पिल्लर इतना जर्जर था कि पांचवीं कक्षा तक में पढ़ने वाले बच्चों के कोमल हाथों के थपेड़ों को भी नहीं सह पाया। इन पिल्लरों को बनाए जाने के बाद इन पर सीमेंट का प्लस्तर तक करवाना स्कूल प्रशासन ने मुनासिब नहीं समझा, जिसकी वजह से पिल्लर धीरे-धीरे इतना जर्जर हो गया कि छुट्टी के बाद रोज की तरह अपने शरारती अंदाज में बच्चे स्कूल से घर के लिए जाते वक्त दीवार पर चढ़ गए और कुछ गेट से झूलने लगे। इसके चलते यह दर्दनाक हादसा पेश आया। मृतक आर्यन की मां स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। बेटी होने के छह साल बाद उनके घर बेटा पैदा हुआ था।

उसका पिता राजकुमार राज मिस्त्री का काम करता है। दोनों ने अपने जिगर के टुकड़े का अपनी आंखों के सामने बेबसी से दम तोड़ते देखा। उनको क्या मालूम था कि सुबह घर से स्कूल के लिए निकला उनका बेटा कभी लौट कर घर नहीं आएगा। दुर्घटना के बाद स्कूलों में जर्जर हाल बिल्डिंगों अथवा चारदीवारियों को लेकर शिक्षा विभाग की जवाबदेही पर सवाल खड़े होने लगे हैं। वहीं, इस घटना से क्षेत्र में मातम का माहौल है। उधर, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक हंस राज गुलेरिया ने कहा कि वह शिमला में हैं। इसके बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन इसकी विभागीय जांच करवाई जाएगी।
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