अंब(ऊना)। बीपीएल चयन प्रक्रिया के कड़े नियमों के कारण गरीब परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वयस्क सदस्यों से जुड़ी एक विशेष शर्त के चलते पिछले एक साल से बीपीएल सूची जारी नहीं हो सकी है। इस मुद्दे पर ग्राम पंचायत चौआर की प्रधान रजनी मनकोटिया, मुबारिकपुर के प्रधान पूर्ण सिंह, ठठल के प्रधान पुष्पिंदर सिंह और उपप्रधान अनिल कुमार समेत कई जनप्रतिनिधियों ने चिंता जताई है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि लगभग दो साल पहले राज्य सरकार ने बीपीएल चयन का अधिकार पंचायतों से लेकर अपने पास रख लिया था लेकिन तब से अब तक पात्र गरीबों का चयन नहीं हो पाया है। सरकार के कठिन नियमों के कारण शुरुआती दौर में ही करीब 90 फीसदी गरीब परिवार इस श्रेणी से बाहर हो गए। इसके बाद विभाग ने मनरेगा मजदूरी के आंकड़ों में बदलाव कर उसे कम भी किया, फिर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। राहत देने के नाम पर नियमों में थोड़ी-बहुत ढील देते हुए इस प्रक्रिया को डेढ़ साल में आठवें चरण तक पहुंचा दिया गया है। खंड अंब के जनप्रतिनिधियों के अनुसार, चयन सूची में 27 से 59 वर्ष की आयु के वयस्क सदस्य होने पर परिवार को बीपीएल से बाहर रखने की शर्त ने गरीबों की मुश्किलें बेहद बढ़ा दी हैं। इस एक कठिन शर्त के सामने बाकी सभी नियमों में दी गई छूट बेअसर साबित हो रही है। इस कड़े नियम की वजह से कई विधवा महिलाएं और दिहाड़ी मजदूरी करने वाले परिवार भी बीपीएल सूची से बाहर हो गए हैं। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर पिछले दो वर्षों से इस चयन प्रक्रिया को अटकाए हुए है। इस मामले पर विकास खंड अधिकारी अंब ओमपाल डोगरा का कहना है कि बीपीएल चयन की कई शर्तों को आसान कर दिया गया है और सूची तैयार करने का काम लगातार जारी है।